भोपाल
मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत स्नातक पाठ्यक्रम वर्ष 2015-16 में प्रारंभ किया गया था। प्रदेश के 313 विकासखण्डों में जन अभियान परिषद के माध्यम से तथा 51 जिलों में महिला बाल विकास विभाग के द्वारा कक्षायें प्रारंभ की गयी थीं। जिसमें प्रत्येक विकासखण्ड और जिलों पर प्रतिवर्ष अधिकतम 40 ग्रामीण, उजार्वान सामाजिक कार्यो में रूचि रखने वाले 12 वीं पास युवाओं का चयन कर प्रवेश दिया गया। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में लगभग 40 हजार छात्र सीधे लाभान्वित होकर स्नातक डिग्री प्राप्त करने हेतु अध्ययनरत थे। 

आप को बता दे मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से संचालित मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व विकास कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं। परिषद की कार्यकारिणी समिति ने निर्णय लिया है कि पाठ्यक्रम का संचालन अब शासकीय महाविद्यालयों में किया जायेगा। इसके साथ ही पूर्व में पढ़ा रहे करीब 2 हजार मेंटरों की रोजी रोटी छिनने का खतरा बन गया है। इनके स्थान पर अतिथि विद्धान द्वारा अध्यापन कराया जायेगा। मेंटरों का 6 करोड़ से अधिक भुगतान रुकने से भी गंभीर संकट बन गया है।

जानकारी के अनुसार कांग्रेस सरकार आते ही अध्यापन व्यवस्था बदलकर उच्च शिक्षा विभाग को दे दी गई है। निर्देश हुये हैं कि प्रदेश के 261 शासकीय महाविद्यालयों में इस पाठ्यक्रम के लिये महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विवि चित्रकूट के अध्ययन केन्द्र के रूप में कार्य करेंगे।  अध्यापन कार्य अतिथि विद्वानों के माध्यम से कराया जायेगा लेकिन अतिथि विद्वान नहीं होने पर नियमित शिक्षक अध्यापन कार्य कर सकेंगे।

परामर्शदाता संगठन ने नई व्यवस्था का विरोध किया है। संगठन अध्यक्ष राजकुमार पटेल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात करते हुये बताया है कि इस व्यवस्था से करीब दो हजार मेंटर बेरोजगार हो जायेंगे। जन अभियान परिषद ने अभी तक मानदेय का छह करोड़ का भुगतान नहीं किया है। पटेल ने बताया कि सीएम ने आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की फिर से समीक्षा की जायेगी।

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