भोपाल
राज्य और केन्द्र सरकार में चल रही खींचातान से प्रदेश में हजारों मजदूरों का भुगतान रुक गया है। सामग्री का पैसा भी नहीं मिलने से ठेकेदारों ने आगे काम करने से हाथ खींच लिये हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार मजदूरी और सामग्री का दो साल के भीतर 350 करोड़ से अधिक का भुगतान ठप है। इससे बुंदेलखंड, चंबल और वघेलखंड के ग्रामीण बड़ी संख्या में पलायन कर गये हैं।

मध्यप्रदेश रोजगार गारंटी परिषद पर मजदूरी और सामग्री का भुगतान नहीं करने के आरोप लगे हैं। इसमें राज्य का तर्क है कि केन्द्र सरकार से पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है। जबकि केन्द्र की जानकारी के अनुसार प्रदेश में इस वर्ष1137 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। प्रदेश को 2 हजार करोड़ का बजट दिया जाना है। मनरेगा का बकाया मांगने के लिये पूर्व में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल दिल्ली भी गये थे और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमार से मुलाकात की थी। विभाग के आला अधिकारी कहते हैं कि केन्द्र से राशि मिलने का इंतजार किया जा रहा है। जबकि केन्द्र सरकार के अनुसार राज्य जबतक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजेगा, तबतक आगे की राशि उपलब्ध नहीं कराई जायेगी।
 
मजदूरी का भुगतान अटक जाने से मजदूरों के सामने रोजी रोजी का गंभीर संकट बन गया है। बुंदेलखंड के छतरपुर, दमोह, पन्ना और सागर जिले के मजदूर अपनो बोरिया बिस्तर लेकर अहमदाबाद, पंजाव और अन्य बड़े शहरों में पलायन कर गये हैं। यही कारण है कि लोकभा चुनाव के दौरान विन्ध्य और चंबल रीजन में उम्मीद से अधिक मतदान नहीं हो सका है।

Source : Agency