भोपाल
मध्य प्रदेश में अब सरकार राजधानी भोपाल के बजाए ज़िलों से चलेगी. लोगों को हर काम के लिए भोपाल नहीं दौड़ना पड़ेगा. उनके काम उन्हीं के ज़िलों में निपटाए जाएंगे.

दिग्विजय फॉर्मूला- कमलनाथ सरकार अपने पुरानी दिग्विजय सिंह सरकार की राह पर चल पड़ी है. वो ज़िलों को तमाम अधिकार देने जा रही है ताकि वहां के काम वहीं निपट सकें. उनके लिए जनता को राजधानी भोपाल ना दौड़ना पड़े.


कमलनाथ सरकार ज़िलों को पावरफुल बनाने वाली है. काम शुरू हो चुका है. लोगों को अपने काम के लिए राजधानी के चक्कर काटने के बजाए जिलों में ही हल मिल जाएगा. निर्माण कार्यो से लेकर जिला स्तर पर होने वाले फेरबदल पर भी जिला सरकार फैसला कर सकेगी.इसकी शुरुआत सरकार ने प्रभारी मंत्रियों को जिला स्तर पर थर्ड और फोर्थ क्लास के अधिकारी कर्मचारियों के तबादलों के अधिकार देकर कर दी है.
दरअसल राज्य सरकार जिला योजना समितियों को वित्तीय से लेकर प्रशासनिक अधिकार देकर उन्हें पावरफुल बनाना चाहती है.

ज़िला सरकार को अधिकार
-तीन करोड़ तक के निर्माण कार्य मंजूर करने का अधिकार होगा
-इससे ज्यादा लागत के निर्माण कार्य के लिए जिला राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे
-निर्माण कार्यो की निगरानी का अधिकार भी समितियों को होगा
-अनुशानहीनता पर कार्रवाई के अधिकार भी समिति को होंगे
-प्रशासनिक फैसले लेने का भी समितियों को अधिकार होगा
-थर्ड और फोर्थ क्लास कर्मचारियों के तबादले कर सकेंगी
-समिति में प्रभारी मंत्री.सांसद,विधायक,जिला प्रतिनिधि शामिल होंगे
-प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की सिफारिश पर फैसले होंगे

काम का बंटवारा- दिग्विजय सिंह सरकार में प्रदेश में ज़िला सरकार थी. उन्होंने सरकार के अधिकारों का विकेंद्रीकरण कर जिला सरकार की व्यवस्था शुरू की थी.अब कमलनाथ सरकार भी यही व्यवस्था लागू कर रही है. ऐसा करने से लोगों को भोपाल के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा और राजधानी भोपाल पर भी काम का बोझ कम होगा. इससे काम जल्दी और आसान होगा.

Source : Agency