भोपाल
 मध्य प्रदेश में मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार होने की संभावना है। मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली में इस संबंध में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक कर चुके हैं। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा है कि वर्तमान कैबिनेट से छह मंत्रियोंं को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इनमें वह मंत्री शामिल होंगे जो बीते छह महीने में सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हुए हैं। लोकसभा के नतीजों के बाद से ही ऐसी अटकलें हैं कि छह मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है जिससे अन्य वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट में शामिल किया जा सके।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम चाहते हैं कि सिंधिया और दिग्विजय के गुट से दो दो मंत्री को हटाया जाए। इसके लिए वह स्वयं ही नाम दें। प्रदेश में कांग्रेस के अलग अलग गुटों के कोटे से कैबिनेट में मंत्रियों को जगह दी गई है। इनमें सिंधिया और दिग्विजय सिंह के भी करीबी शामिल हैं।  दिग्गी राजा का दबदबा अन्य के मुकाबले अधिक है। सूत्रोंं के मुताबिक कमलनाथ छह नए चेहरोंं को कैबिनेट में शामिल करना चाहते हैं। इनमें निर्दलीय और अन्य दलों के विधायक भी शामिल होंगे। विपक्षी पार्टी बीजेपी लगातार कमलनाथ के सफर को छोटा बताने का दावा करती रही है। कांग्रेस को डर है कि कहीं पार्टी के विधायक का सौदा न हो जाए। जिससे उनकी सरकार पर खतरा आ जाए। इन सब से बचने के लिए और सरकार में स्थिरता लाने के लिए कमलनाथ कैबिनटे का दोबारा गठन करना चाहते हैं। बुरहानपुर से निर्दलीय जीते विधायक शेरा समय समय पर सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायक भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें केपी सिंह, एंदल सिंह कंसाना जैसे दिग्गज नाम भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। जबकि, उसे निर्दलीय और अन्य पार्टी के विधायकों का बाहर से समर्थन मिला है। जिसके दम पर कांग्रेस प्रदेश में सराक चला रही है। हाल ही में झाबुआ विधानसभा सीट से विधायक जीएस डामोर लोकसभा चुनाव जीते हैं। उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। अब वह सीट खाली हो गई है। आगामी थह महीनों में वहां उप चुनाव होना है। ऐसे में कांग्रेस को एक और सीट जीतने की पूरी उम्मीद है।

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