भोपाल
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायतों समूहों में प्रशिक्षित महिलाएँ पंजाब सहित अन्य राज्यों के किसानों को भी जैविक खेती के गुर सिखा रही हैं। मिशन द्वारा स्व-सहायता समूहों की 5 हजार महिलाओं को जैविक खेती और पशु-पालन की नवीन तकनीकी सिखाई गई है। इन्हें समूह में सामुदायिक स्त्रोत व्यक्ति के रूप में चिन्हित किया गया है। आम बोल-चाल की भाषा में इन्हें "कृषि-सखी" कहा जाता है। पिछले जुलाई - अगस्त माह में 20 कृषि-सखियों ने पंजाब के 4 जिलों में किसानों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने भू-नाडेप, वर्मीपिट, मृदा परीक्षण, बीज चयन, बीज श्रेणीकरण, फसल चक्र आदि के बारे में समझाया। परम्परागत सामग्री और तकनीकों के विषय में भी वहाँ के किसानों को बताया। कृषि सखियों ने किसानों को उनके गाँव में रहकर ही कृषि-प्रयोग भी करके दिखाए।

सीधी जिले की कृषि सखी लक्ष्मी ताम्रकार, विमलेश यादव, ललिता साहू, पूजा रजक एवं रीवा जिले की निर्मला दुबे ने पंजाब के गुरदासपुर जिले का भ्रमण किया। अनूपपुर जिले की चंपा सिंह, राधा सिंह, यशोदा धनवार, इंद्रवती और शहडोल जिले की ज्ञानवती यादव ने पंजाब के फिरोजपुर जिले का, पन्ना जिले की तुलसी विश्वास, ऋतु अहिरवार, शिवपुरी जिले से ऊषा परिहार, सरोज कुशवाह और शहडोल जिले की रेखा पटेल ने पंजाब के पटियाला जिले का तथा शहडोल जिले की रूही बेगम, ललिता पनिका, माया पटेल, पुष्पा कचेर, गीता केवट ने पंजाब के संगरूर जिले के किसानों को जैविक खेती की पद्धति से परिचित कराया।

भारत सरकार ने सराहा
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश आजीविका मिशन की कृषि-सखियों के कार्य की सराहना की है। संयुक्त सचिव सुश्री लीना जौहरी ने समूहों के सदस्यों से नई दिल्ली में मुलाकात की। इससे पूर्व कृषि-सखियाँ हरियाणा और उत्तरप्रदेश का भ्रमण कर चुकी हैं।

Source : Agency