विजय मत डॉट कॉम,नई दिल्ली।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी का पार्टी नेताओं के साथ वन टू वन दिल्ली में चल रहा है। मप्र कांग्रेस के नये अध्यक्ष को लेकर मुख्य विवाद मुख्यमंत्री कमल नाथ और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच किसी एक नाम पर सहमति न बन पाना बताया जा रहा है। हाईकमान चाहता है कि इन दोनों नेताओं की सहमति से किसी का नाम तय हो। सूत्रों का कहना है कि दो -तीन दिन के अंदर नया अध्यक्ष पार्टी को मिल जाएगा। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनना चाहते बल्कि वे रामनिवास रावत को अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री कमल नाथ गृहमंत्री बाला बच्चन को पद दिलवाने के लिए प्रयासरत हैं,लेकिन एक व्यक्ति एक पद सिद्धांत के चलते उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।  इसके लिए बाला तैयार नहीं हैं। प्रदेश अध्यक्ष के लिए एजुकेशन मिनिस्टर प्रभुराम चौधरी का नाम अचानक सबसे ऊपर आया है। सूत्रों के अनुसार श्रीमती गांधी ने उन्हें दिल्ली बुलाकर मुलाकात भी की है। इधर, नाथ ने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का नाम सोनिया गांधी को सुझाया है।  प्रभुराम चौधरी संगठन के लिए मंत्री पद छोड़ने की सहमति भी हाईकमान के समक्ष दे चुके हैं। दरअसल,हाईकमान की सोच है कि जिसे भी अध्यक्ष बनाया जाए वह एक समान दृष्टि से सभी कार्यकर्ता को समझे। वह किसी एक नेता या गुट के प्रभाव में कार्य न करे। मप्र में कांग्रेस की सरकार 15 साल बाद बनी है मगर सरकार के मंत्रियों के कामकाज से पार्टी के प्रति बहुत अच्छा वातावरण नहीं नहीं बन पाया है। मंत्रियों के सुर बदल चुके हैं। कार्यकर्ताओ से उंन्होने दूरी बना रखी है। मंत्री चमचों से घिर गए हैं। इससे संगठन को मजबूती मिलने की बजाय कमजोर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री कमल नाथ की छवि जनता में जरूर बढ़ रही है। नाथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं लेकिन सरकारी कार्यों की व्यस्तता के कारण पार्टी के लिए समय नहीं दे पा रहे। यही वजह है कि जहां भाजपा का सदस्यता अभियान नया कीर्तिमान रच चुका हैं वहीं कांग्रेस नेताओं की सदस्यता अभियान को लेकर कोई रुचि नजर नहीं आती। संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर को बार बार जिलाध्यक्षो  को पत्र लिखना पड़ रहा है। दिग्विजय सिंह के नाम पर सहमति बनाने के जो प्रयास दिल्ली में हो रहे हैं,उस पर सिंधिया की जोरदार आपत्ति के बाद रोक लग गई है। आज कमल नाथ ने सोनिया से मिलकर इस पूरे विषय पर रायशुमारी की है। इस बात की पूरी संभावना है कि सिंधिया की मर्जी का कोई नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होगा।

वर्जन-

सोनिया गांधी जी से विभिन्न मुद्दों पर बात हुई है।मध्यप्रदेश के संगठन पर भी बात हुई, मैं केन्द्र में कई वर्षों तक मंत्री रहा हूँ ,अन्य प्रदेशों पर भी बात हुई।
प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कहा, मैं तो लगा हूं नया अध्यक्ष जल्द  बनाया जाए, क्योंकि मेरे पास मुख्यमंत्री पद का भी दायित्व है।चूँकि लोकसभा का चुनाव था , मुझे कहा गया था कि मुझे अभी तह दायित्व संभालना है।उसके बाद लोकसभा चुनाव के बाद मैंने फिर से कहा था कि नया अध्यक्ष बनाना चाहिए।
ज्योतिरादित्य सिंधिया किसी भी तरह नाराज नहीं है। वह पूरी तरह से साथ हैं।
कमल नाथ
मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष मप्र कांग्रेस

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