रायपुर
चित्रकोट उपचुनाव के लिए अब गिनती के दिन शेष रह गए हैं लेकिन जैसी रणनीति चुनाव के लिए बननी चाहिए वैसी बन नहीं पा रही है। क्या नेता नतीजे से वाकिफ हो गए हैं या और कोई वजह है? दंतेवाड़ा उपचुनाव की बात करें तो पूरी ताकत दोनों ही दलों ने झोंक दी थी। शहादत का दंश तो दोनों ही दलों ने झेला था लेकिन मतदाताओं ने फैसला सोंच समझकर किया। कांग्रेस ने दोनों ही जगहों पर स्थानीय को प्राथमिकता देते हुए कमान सौंपी,वहीं भाजपा को बाहरी नेताओं का सहारा लेना पड़ा। एक बड़ी बात सामने आई है कि भाजपा के बड़े नेता चित्रकोट की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं,जिससे पार्टी की चिंता बढ़ गई है और संगठन की ओर से मान मनौव्वल का दौर जारी है।

चित्रकोट की सीट दीपक बैज के सांसद चुन लिए जाने के कारण रिक्त हुई है इसलिए पार्टी ने दीपक को ही पीसीसी चीफ मोहन मरकाम और अन्य के साथ बागडोर सौंप दी है। भले ही स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई है लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मंत्रिमंडल के सहयोगी ही प्रचार अभियान संभालेंगे। चूंकि यह सीट कांग्रेस के पास थी इसलिए वे फायदे में दिख रहे हैं। जबकि भाजपा को यह सीट कांग्रेस से छीनने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमनसिंह,केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह,पार्टी अध्यक्ष विक्रम उसेंडी,नेता प्रतिपक्ष कौशिक को लेकर जारी कार्यक्रम में कहा गया है कि वे छोटी-छोटी सभा आहूत कर मतदाता तक पहुंचेंगे।

भाजपा में दंतेवाडा की कमान शिवरतन शर्मा,नारायण चंदेल,ओपी चौधरी को दी गई थी। जहां हार का सामना करना पड़ा। उपचुनाव में जिन लोगों को अच्छा अनुभव है उन्हे कमान देने के बात तो आई लेकिन चित्रकोट के लिए फिर वे अलग थलग कर दिए गए। एक तबके में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि पार्टी उपचुनाव के लिए पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को क्यों बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंप रही है। वहीं कुछ का कहना है कि बृजमोहन,प्रेमप्रकाश,अजय चंद्राकर जैसे लोग स्वंय यह जिम्मा लेना नहीं चाह रहे हैं। हालांकि पार्टी संगठन इस बात को खारिज कर रही है।

Source : Agency