नई दिल्ली
भाजपा के संगठन चुनावों में विभिन्न राज्यों में भावी नेतृत्व को लेकर भी नजर रखी जा रही है। खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी सत्ता में रहते हुए विधानसभा चुनाव हारी है। इनमें सबसे अहम तीन राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान है, जहां भाजपा को बीते साल सत्ता गंवानी पड़ी थी। इन राज्यों में नए नेतृत्व की तलाश शुरू हो गई है।

पार्टी के संगठन चुनाव के जरिये राज्य के विभिन्न नेताओं को इस कसौटी पर कसा जा रहा है। इस काम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अहम भूमिका है, जो तीनों राज्यों में मौजूदा व नए नेताओं खासकर युवाओं पर बारीक नजर रखे हुए है। भाजपा नेतृत्व इन तीनों राज्यों में अगले विधानसभा चुनाव से पहले युवा व प्रभावी नेतृत्व उभारना चाहता है।

पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि नए नेतृत्व को सामने लाने का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि किसी नेता को हटाया जा रहा है या रिटायर किया जा रहा है। नए व युवा नेताओं को सामने लाना एक सतत प्रक्रिया है। जो नेता अभी हैं उनको भी उस समय के प्रभावी नेताओं के सामने भविष्य की रणनीति के तहत सामने लाया गया था।

संगठन के जरिए होगा बदलाव : विधानसभा चुनाव हारने के बाद तीनों राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों के पांच साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करने की संभावना काफी कम है। 

युवा नेताओं पर नजर
इस प्रक्रिया में संगठन चुनावों की अहम भूमिका होती है, क्योंकि सदस्यता अभियान से लेकर मंडल, जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर चुनावों से नई समितियां व नए पदाधिकारी चुने जाते हैं। इस दौरान सभी स्तरों पर नए व ऊर्जावान नेता भी सामने आते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व तीनों राज्यों में कुछ नेताओं की पहचान करेगा और उनको भविष्य की जिम्मेदारियों के मद्देनजर संगठन व प्रबंधन की कसौटी पर कसेगा। 

Source : Agency