नई दिल्ली 
महेंद्र सिंह धौनी को आपने आमतौर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए नहीं देखा होगा। चाहे क्रिकेट का मैदान हो, या वह मैदान के बाहर हों हमेशा शांत रहते हैं। सिचुएशन कैसी भी हो धौनी उससे शांति के साथ सुलझाना जानते हैं। इसलिए उन्हें भारतीय क्रिकेट में 'कैप्टन कूल' का नाम दिया गया। लेकिन धौनी का कहना है कि वह भी आम इंसान की तरह ही हैं। वैसे ही सोचते हैं, उन्हें भी गुस्सा आता है और फ्रस्टेशन होता है, लेकिन वह बस नेगेटिव विचारों पर अपना कंट्रोल दूसरे लोगों के मुकाबले में ज्यादा बेहतर कर पाते हैं। 

दो बार विश्व चैंपियन टीम की अगुवाई करने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज ने महेंद्र सिंह धौनी ने बताया कि हर जीत और हर हार के दौरान भावनाएं उन पर भी हावी रही हैं, लेकिन मैं उन्हें काबू करना जानता हूं। धौनी ने कहा, ''मैं भी आम इंसान हूं, लेकिन मैं किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से काबू में रखता हूं।''
 
जुलाई में आईसीसी विश्व कप 2019 सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद धौनी के भविष्य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। उन्होंने फिलहाल कुछ समय के लिए विश्राम लिया है। धौनी ने विपरीत परिस्थितियों से पार पाने के संबंध में कहा, ''हर किसी की तरह मुझे भी निराशा होती है। कई बार मुझे भी गुस्सा आता है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इनमें से कोई भी भावना रचनात्मक नहीं है।''

इस 38 साल के खिलाड़ी ने कहा कि समस्याओं का जाल बुनने के बजाय उनका समाधान ढूंढना उनके लिए कारगर साबित रहा है। उन्होंने कहा, ''इन भावनाओं की तुलना में अभी क्या करना चाहिए यह अधिक महत्वपूर्ण है। अगली क्या चीज है जिसकी मैं योजना बना सकता हूं? वह अगला व्यक्ति कौन है जिसका मैं उपयोग कर सकता हूं? एक बार जब मैं यह सोचने लगता हूं तो फिर मैं अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से काबू कर लेता हूं।''
 
महेंद्र सिंह धौनी ने फिर से कहा कि अंतिम परिणाम से महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अपनी कप्तानी के दौरान वह हमेशा इस बात पर जोर देते रहे थे। उन्होंने कहा, ''अगर वह टेस्ट मैच है तो आपके पास दो पारियां होती है और आपको अपनी अगली रणनीति तैयार करने के लिए थोड़ा अधिक समय मिलता है। टी-20 में सब कुछ तुरत फुरत होता है तो इसमें अलग तरह की सोच की जरूरत होती है।''

धौनी ने कहा, ''वह एक खिलाड़ी हो सकता है जिसने गलती की या वह पूरी टीम हो सकती है। यह भी हो सकता है कि प्रारूप चाहे कोई भी हो हमने अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल नहीं किया हो।''

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