नई दिल्ली 
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि फैसला सुनाते वक्त माननीय न्यायालय यह ध्यान में रखे कि इससे आने वाली पीढ़ियां प्रभावित होंगी। साथ ही मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि उसका फैसला भारतीय संवैधानिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करने वाला होना चाहिए। गौरतलब है कि देश के इस सबसे पुराने मुकदमे में मुस्लिम पक्षकारों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में सील बंद लिफाफे में 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' दाखिल किया। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से  'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' सील बंद लिफाफे में दाखिल करने पर हिन्दू पक्षकारों ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने रविवार को अपनी याचिका सार्वजनिक कर दी।
 

मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दाखिल 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' के सवाल पर कहा, 'माननीय कोर्ट का फैसला जिस किसी के भी पक्ष या विपक्ष में आए लेकिन यह ध्यान रखना होगी कि इससे आने वाली पीढ़ियां प्रभावित होंगी। इस फैसले का देश की राज्यव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उन करोड़ों लोगों पर असर पड़ेगा, जो इस देश के नागरिक हैं। वे इस देश की संवैधानिक मूल्यों में तब से विश्वास रखते हैं, जब भारत 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र बना था। ज​बकि इस कोर्ट के फैसले का दूरगामी प्रभाव होगा, तो उसे इस ऐतिहासिक निर्णय के परिणामों का भी ध्यान रखना होगा। फैसला ऐसा हो जिसमें इस देश की संवैधानिक मूल्यों की झलक मिले।' 
 
मुस्लिम पक्ष ने भारत की न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास और आस्था जताया। उन्होंने कहा, 'कोर्ट जब इस मुद्दे पर निर्णय करेगा तो बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक मूल्यों का ध्यान रखेगा। मोल्डिंग द रिलीफ इस कोर्ट की जिम्मेदारी है, जो हमारे संविधान का अपने आप में एक पहरेदार है। यह स्टेटमेंट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन और अन्य द्वारा जारी किया गया था। गौरतलब है कि इस मामले में 'राम लला​ विराजमान' पक्ष ने शनिवार को एक लिखित निवेदन फाइल किया था। जिसमें पक्ष ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि के अलावा 1993 में केंद्र सरकार द्वारा कब्जा किए गए 67.703 एकड़ जमीन पर भी अपना दावा ठोका था।

Source : Agency