भोपाल
राजधानी शहर में दस कालेज संचालित हो रहे हैं। इसमें से सिर्फ तीन में ही नियमित प्राचार्य मौजूद हैं। गत वर्ष दिसंबर में एक्सीलेंस कालेज प्राचार्य सेवानिवृत्त हो गर्इं। राजधानी के दस कालेजों में सिर्फ तीन में ही नियमित प्राचार्य हैं। स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग नियमित प्राचार्यों का इंतजाम नहीं कर रहा है। इससे राजधानी की शिक्षा व्यवस्था हासिए पर आ गई है।

राजधानी को एजुकेशन हब बनाने का दावा करने वाला उच्च शिक्षा विभाग स्थिति पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है। भोपाल के एक्सीलेंस, हमीदिया, एमवीएम,  गीतांजलि, एमएलबी, नवीन, नरेला और बेनजीर कालेज प्राचार्य के अभाव में चलेगा। एक्सीलेंस कालेज की प्रिंसिपल गीता सक्सेना सेवानिवृत्त हो गई हैं। तब से राज्य का एकमात्र एक्सीलेंस कालेज प्रभारी प्राचार्य एसएस विजयवर्गीय के भरोसे चल रहा है। प्रदेश में 400 से ज्यादा कालेज प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। प्रभारियों से जहां उच्च शिक्षा विभाग परेशान हो रहा है। वहीं कालेजों की मैनेजमेंट भी बिगड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों को मिलने वाले सुविधाएं सफर होने के साथ पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

ये हैं कालेजों के प्रभारी
प्राचार्य सेवानिवृत्त होते रहे, लेकिन वहां नियमित प्राचार्य देने की वजाय विभाग प्रभारियों की फौज तैयार करता चला गया। प्रभारी प्राचार्य से समूचे प्रदेश की हालात बहुज ज्यादा खराब हैं। बेनजीर में सरोज श्रीवास्तव, हमीदिया में पीके जैन, एमवीएम राकेश सिंह, एमएलबी में एसबी गोवस्वी, गीतांजलि में अलका डेविड, नवीन में राजीव चौबे, एक्सीलेंस में गीता सक्ेसना प्रभारी प्राचार्य के तौर पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में सिर्फ नूतन कालेज में डॉ. मंजूला शर्मा, भेल में मथुरा प्रसाद और स्टेट ला कालेज में सुधा बैसा पदस्थ हैं।  

बढ़ रही सेवानिवृत्ति की संख्या
महीने दर महीने प्रदेशभर में प्रोफेसर, डिग्री और पीजी प्राचार्य के सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस साल प्रदेशभर से दो दर्जन से ज्यादा प्रोफेसर और प्राचार्य सेवानिवृत्त हो गए हैं। विभाग ने लंबे समय से प्रोफेसरों की पदान्नति रोक रखी है, जिसके कारण कालेज प्रभारियों के भरोसे आ गए हैं।  

 

Source : Agency