सूरत
राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फर्जी करेंसी रैकेट के सिलसिले में एक मंदिर के पुजारी और 5 अन्‍य के खिलाफ विशेष एनआईए कोर्ट में चार्जशीट फाइल किया है। इन सभी 6 लोगों पर पिछले कुछ साल से नकली नोटों के रैकिट को चलाने का आरोप है। पुजारी पर आरोप है कि वह अक्‍सर धार्मिक स्‍थानों पर जाता रहता था और पूजा के प्रसाद बॉक्‍स में 2 हजार रुपये के नकली नोट डाल देता था।

पुजारी के रैकेट में शामिल होने के कारण यह पूरा मामला बेहद संवेदनशील बन गया था। इस पूरे रैकेट का खुलासा उस समय हुआ जब सूरत पुलिस के क्राइम ब्रांच ने खेड़ा जिले के अंबाव गांव में स्थित स्‍वामी नारायण मंदिर में छापा मारा। आश्रम में नकली नोट छापने पर एक वर्कशॉप चल रही थी। पुलिस को वहां पर भारी मात्रा में नकली नोट के बंडल देखकर आश्‍चर्य का ठिकाना नहीं रहा।

पुजारी राधारमण की थी नोटों को बांटने की जिम्‍मेदारी
पुलिस ने स्‍वामी नारायण मंदिर के पुजारी राधारमण स्‍वामी और प्रतीक चोडवडिया, प्रवीण चोपड़ा, उसके बेटे कालू चोपड़ा और मोहन वाघवाडे को अरेस्‍ट कर लिया है। प्रवीण के दूसरे बेटे से 2000 रुपये 5013 नोट मिले हैं जिनका कुल मूल्‍य 1.26 करोड़ रुपये है। प्रवीण चोपड़ा ने नकली नोटों को छापा था। इन नोटों को बांटने की जिम्‍मेदारी स्‍वामी नारायण मंदिर के पुजारी राधारमण की थी।

मुख्‍य आरोपी चोपड़ा को नकली नोटों के मामले में गुजरात और मुंबई में पहले भी अरेस्‍ट किया जा चुका है। आरोपी सूरत से लेकर खेड़ा तक के पूजा के प्रसाद बॉक्‍स में फर्जी नोटों को डाल देते थे। सूरत के क्राइम ब्रांच के इस नेटवर्क के खुलासे के बाद एनआईए ने पूरे मामले को अपने पास ले लिया और जेल में जाकर आरोपियों से पूछताछ की। राधारमण स्‍वामी वर्ष 2004 से 2007 तक वीरसाद स्‍वामी नारायण मंदिर में मुख्‍य पुजारी रह चुका है। वह वडोदरा के कलाली मंदिर में भी वर्ष 2007 से 2009 तक पुजारी का काम कर चुका है।

Source : Agency