भोपाल
इन दोनों बाघ शावकों (Tiger cub) की मां की मौत हो गई है और उसके बाद दोनों शावक शिकार नहीं कर पाने के कारण जंगल में भोजन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए दोनों शावकों को रेस्क्यू कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रखा गया था. फिलहाल उम्र कम होने के कारण दोनों शावक शिकार नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में वन विभाग ने दोनों शावकों को रेस्क्यू कर वन विहार भेजने का फैसला लिया है. दोनों शावक बुधवार देर रात तक वन विहार पहुंच जाएंगे. वन विहार में एक उमरदराज बारहसिंघा की मौत भी हो गई है.

वन विहार की एक टीम बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से दोनों शावक को लेकर भोपाल के लिए रवाना हो चुकी है. रेस्क्यू टीम में डॉक्टर अतुल गुप्ता के साथ वन विहार के कर्मचारी शामिल हैं. वन विहार प्रबंधन शावकों को वन विहार में छोटे-मोटे शिकार करना सिखाएगा. उसके बाद युवा होने पर दोनों को जंगलों में छोड़ा जा सकेगा. तब तक शिकार करने और प्राकृतिक परिवेश में रहने के लायक होने तक दोनों शावक वन विहार में रहेंगे. इन दोनों मेहमानों के वन विहार आने से यहां बाघों की संख्या 12 हो जाएगी. वन विहार प्रबंधन दोनों शावकों को सैलानियों के लिए फिलहाल डिस्प्ले में नहीं रखेगा. दोनों शावकों के सामान्य होने पर वन विहार इन दो बाघ शावकों को खुले जंगल में छोड़ने का फैसला लेगा.

वन विहार को जहां दो नए मेहमानों के स्वागत के लिए सजाया जा रहा है. वहीं वन विहार में आज मातम का भी माहौल रहा. वन विहार में नर बारहसिंघा की मौत हो गई है. 25 फरवरी की शाम को बारहसिंघा बाड़े में बुजुर्ग बारहसिंघा की मौत हो गई. बारहसिंघा बीते 3 दिनों से अस्वस्थ था. 2015 में कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला से 16 बारहसिंघा वन विहार लाए गए थे. एक बारहसिंघा की मौत के बाद वन विहार में कुल बारहसिंघा की संख्या 15 रह गई है. मृत बारहसिंघा का पोस्टमार्टम आज किया गया. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बारहसिंघा की मौत का कारण उम्र का ज्यादा होना और आंतरिक अंगों का काम काम नहीं करना पाया गया है. वन विहार प्रबंधन के मुताबिक बारहसिंघा की मौत स्वाभाविक है.

Source : Agency