कोरबा
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित कोरबा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेलाकछार के आश्रित वन ग्रामों में राहत की कोई ऐसी सड़क नहीं बन पाई, जिससे होकर सरकार की योजनाएं यहां पहुंच सके. भवना, लाल माटी, आमाडांड, बगदरी ढांड, सरीडीह, केराकछार आजाद भारत के ऐसे गांव हैं, जहां वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है.

हर पांच साल बाद वादे और घोषणाओं के सब्जबाग वादाखिलाफी को देखकर आदिवासियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया हैं. बता दें कि गांव के घरों की दीवारों से लेकर पेड़ों तक पर टांगी गई पोस्टर यह बताने के लिए काफी है कि ग्रामीणों को क्या चाहिए. महिलाएं जहां उज्जवला मांग रही हैं, तो नई पीढ़ी सरकार से मोबाइल की मांग कर रही है. पंचायत में शौचालय आधे-अधूरे हैं, तो बच्चों की आंगनबाड़ी सूनी पड़ी है.

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