इस वर्ष धन त्रयोदशी का पर्व आकाश मण्डल के 13वें नक्षत्र हस्त के साए तले मनाया जाएगा। हस्त नक्षत्र के स्वामी मन और धन के स्वामी चंद्रमा है। लिहाजा इस वर्ष का धनतेरस का पर्व सुख, समृद्धि और आनंद लेकर आ रहा है।

 धनतेरस के अवसर पर रात 10 बजकर 11 मिनट तक विश्वकुंभ योग रहेगा। उसके बाद प्रीति योग आरंभ होगा। विश्वकुंभ योग में धनतेरस पूजन आर्थिक स्थिति के लिए आशातीत परिणाम देने वाला रहेगा। जबकि प्रीति योग में पूजन सफलता, प्रेम और विकास के साथ आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करेगा।
 
धन त्रयोदशी का आरंभ 4 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद 1 बजकर 24 मिनट पर होगा, जो 5 तारीख की रात 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। सोमवार को धनतेरस होने से राहुकाल सुबह 7.30 से 9.00 बजे तक रहेगा। धनतेरस पर वृषभ लग्न में कुबेर और लक्ष्मी का पूजन श्रेष्ठ होगा। भगवान धन्वंतरि को हिंदू धर्म में देव वैद्य का पद हासिल है। लिहाजा, उत्तम स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि पूजन अमृत चौघड़िया, लाभ चौघड़िया, धनु लग्न या कुंभ लग्न में करना चाहिए।
 
सूर्यास्त के पश्चात अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर 4 बातियों का दीपदान यानि दीप का प्रज्जवलन करना चाहिए। रात में इस दिन आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके भगवती लक्ष्मी को नैवेद्य में धनिया, गुड़ व धान का लावा अवश्य अर्पित करना चाहिए। रात्रि में ध्यान में प्रविष्ट होकर भजन के द्वारा यानि बाह्य कर्ण बंदकर आत्मा के कानों से ब्रह्माण्डीय ध्वनियों के श्रवण का अभ्यास आंतरिक व मानसिक बल प्रदान करेगा। 

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