वॉशिंगटन 
अमेरिका के ईरान पर लगाए प्रतिबंध आज से प्रभावी हो जाएंगे। ईरान से परमाणु डील से अलग होने के बाद से ट्रंप प्रशासन का रवैया ईरान को लेकर काफी सख्त है। अमेरिका ने पश्चिमी एशियाई और इस्लामिक देशों को भी ईरान से व्यापार समझौते नहीं करने की धमकी दी है। पश्चिमी एशियाई देशों को ईरान का साथ देने पर बुरे अंजाम भुगतने की बात डॉनल्ड ट्रंप कई बार कर चुके हैं।  
 
क्या है यह परमाणु डील? 
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आखिरी कार्यकाल में अमेरिका और ईरान के बीच यह परमाणु डील हुई थी। इस डील में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य जैसे चीन, फ्रांस, इंग्लैंड और रूस भी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अस्थायी सदस्य जर्मनी भी इस डील में सहयोगी हैं। ओबामा प्रशासन ने 2015 में ईरान के साथ यह डील की थी। 
 
ओबामा प्रशासन के हर फैसले को बदल देना चाहते हैं ट्रंप 
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के हर फैसले को बदलने की हड़बड़ी में नजर आ रहे हैं। नाफ्टा, ओबामाकेयर और पैरिस जलवायु समझौता की ही तरह डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए। परमाणु डील के बाद से ईरान पर इस तरह के प्रतिबंध हटा दिए गए थे। ओबामा प्रशासन ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों में छूट देते हुए खाद्य और फर्मास्युटिकल क्षेत्र में व्यापार की अनुमति दी थी। 

क्या बदलाव हुआ है? 
ट्रंप प्रशासन के ईरान पर लगाए प्रतिबंध के बाद इस एशियाई मुल्क के लिए विश्व दो भागों में बंट गया है। पूर्व में यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाने के कारण ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का ध्वनिमत से पूरे विश्व ने समर्थन किया था। हालांकि, इस बार स्थिति ऐसी नहीं है। यूरोपिन यूनियन ने दो-टूक अंदाज में कह दिया है कि ट्रंप प्रशासन के लगाए प्रतिबंधों के बाद भी ईरान के साथ कानूनी तरीके से होने वाले व्यावसायिक समझौते जारी रहेंगें। भारत समेत आठ ऐसे देश हैं जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी तेहरान के साथ व्यावसायिक संबंधों को खत्म नहीं करने का ऐलान कर चुके हैं। इन सभी देशों का कहना है कि अगर ईरान से तेल आयात पर अचानक ही इस किस्म का प्रतिबंध लगा दिया गया तो इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का संतुलन गड़बड़ा जाएगा। 

Source : Agency