सुकमा
जिले में चुनाव की प्रक्रिया शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराना प्रशासन व पुलिस के सामने कड़ी चुनौती बना हुआ हैं। नक्सली लगातार चुनाव का बहिष्कार करते हुए अंदरूनी गांव मे ग्रामीणों की बैठक लेकर सख्त चेतावनी दे रहे हैं। खौफ का आलम ऐसा हैं कि अधिकांश युवा वर्ग गांव छोड़कर सीमावर्ती राज्य आंध्र का रुख कर रहे हैं। वही नक्सली बहिष्कार के चलते सुरक्षाबल भी पूरी तरह मुस्तैद हैं अंदरूनी क्षेत्र में लगातार आपरेशन चलाए जा रहे हैं साथ ही नक्सल गढ़ में नए कैम्प भी स्थापित किए गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार नक्सली दहशत की वजह से चुनाव से पहले गांव छोड़कर युवा आंध्र की ओर भाग गए हैं। पिडमेल, अरलमपल्ली, डब्बाकोंटा, कसालपाड़, बुर्कापाल सहित अंदरूनी क्षेत्र के अधिकांश गांव में नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार की दहशत व्याप्त हैं। ग्रामीण असमंजस में हैं कि सरपंच-सचिव के कहने पर अगर वोट डालने चले भी गए तो बाद में क्या स्थिति होगी। इन इलाकों में ग्रामीणों की बैठक लेकर नक्सली कह भी चुके हैं कि जो भी वोट डालेगा उसके साथ ठीक नही होगा। ऐसे में युवाओं ने चुनाव तक गांव छोड़ना ही मुनासिब समझा हैं।

जिले में लगातार पर्चे फेंककर नक्सली राजनीतिक दलों को अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं जिसको देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा गाइडलाइन जारी करके नेताओं को पूरी तरह से सतर्कता बरतने को कहा गया हैं। साथ ही जहां भी सभा हो रही हैं वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। अंदरूनी अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में नेताओं को सभा लेने के लिए बचने को कहा गया है।

शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए बाहर से अर्द्धसैनिक बलों की 41 कंपनी सुकमा पहुंच चुकी हैं वही यहां 31 कंपनी पहले से ही मौजूद हैं। बाहर से आए जवानों को दो हफ्ते की ट्रेनिंग देकर इलाके के बारे में विस्तार से समझाया गया हैं। फील्ड एक्सपर्ट द्वारा जवानों को यह बताया गया हैं कि अंदर जाते समय कैसे कहां से जाना हैं और किन बातों को ध्यान में रखना है।

पुलिस द्वारा नक्सल गढ़ में दो नए कैम्प की भी स्थापना की गई हैं जिसमें एलारमड़गु व कुन्न शामिल हैं ये दोनों जगह नक्सलियों का सेफ जोन माना जाता रहा हैं। एसपी अभिषेक मीना ने बताया कि कैम्प खुलने के बाद नक्सलियों पर खासा असर पड़ा है।

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