रायपुर
सत्तीबाजार फव्वारा चौक स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर करीब 150 साल पुराना है, जहां धनतेरस से लेकर भैया दूज तक पूजा करने और दीपदान करने सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। दीपावली की रात घर में लक्ष्मी पूजा करने के पश्चात सदर बाजार, सत्तीबाजार, तात्यापारा, ब्राह्मणपारा, बूढ़ापारा, पुरानी बस्ती के लोग लक्ष्मी-नारायण का दर्शन अवश्य करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

मंदिर के प्रमुख संजय तिवारी और पं.ओंकार प्रसाद बताते हैं कि डेढ़ सौ साल पहले 1870 में मंदिर की स्थापना की गई थी। परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर आसपास के भक्त प्रतिदिन मंदिर में आते हैं। दीपावली की रात भक्तों का तांता लगा रहता है।

दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा वाले दिन मंदिर में अन्नकूट का आयोजन किया जाता है। इसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करने आते हैं। अपने साथ परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के लिए टिफिन भी ले जाते हैं।

मान्यता है कि धनतेरस और दीपावली पर दीपदान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। दूर-दूर से लोग दीपदान करने पहुंचते हैं। पूरा मंदिर परिसर दीपों से जगमगा उठता है।

बूढ़ातालाब के सामने भगवान गणेश के एकमात्र मंदिर में भी लक्ष्मी पूजा के बाद दर्शन करने भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी पं.वीरेन्द्र शुक्ला ने बताया कि पीपल पेड़ के नीचे एक छोटी सी गणेशजी की प्रतिमा थी। आसपास के भक्तों ने मिलकर 1990 के दौरान मंदिर का नवनिर्माण किया। गणेशजी का एकमात्र मंदिर होने के कारण यहां दूर-दूर से भक्त आकर मन्नत मांगते हैं।

Source : Agency