रायपुर
गाय के गले में बांधी जाने वाली सोहई में सजी कौड़ियां अथवा आदिवासियों के मोर-मुकुट में सजाई गई कौड़ियों को लोग भले ही साधारण कौड़ी समझें। इन कौड़ियों का महालक्ष्मी की पूजा में विशेष महत्व है। साथ ही गोमती नदी में पाए जाने वाले गोमती चक्र को भी यदि पूजा में रखा जाए तो यह शुभदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूजा के बाद कौड़ी और गोमती चक्र को तिजोरी, आलमारी में रखने से व्यक्ति के बिगड़ते काम भी बनने लगते हैं।

ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काले धागे में कौड़ी बांधकर बच्चे के गले में पहनाती हैं। खासकर गाय के गले में बंधी सोहई में से कौड़ी निकालकर बच्चों के गले में पहनाने की मान्यता है।

मान्यता है कि मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। समुद्र से अनेक रत्न भी मिले थे। इसमें कौड़ी भी निकली थी। कौड़ी सफेद, भूरी और पीली तथा चितकबरी रंग की पाई जाती है। कौड़ियों को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।

पं.मनोज शुक्ला बताते हैं कि तंत्रशास्त्र के अनुसार दीपावली पर महालक्ष्मी की पूजा में 11 कौड़ियां रखने का विधान बताया गया है। इन कौड़ियों को पीले रंग के कपडे में बांध कर तिजोरी में रखने से बरकत होती है। घर में सुख समृद्धि लाने के लिए मुख्य द्वार पर 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधने से सुख समृद्धि का वास होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती।

जिस तरह शंख प्राकृतिक रूप से समुद्र में पाया जाता है उसका निर्माण नहीं किया जाता। उसी तरह गोमती चक्र भी गोमती नदी में ही पाया जाता है।

तंत्र शास्त्र के अनुसार यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में रखने से घर में सुख-शान्ति बनी रहती है। दीपावली के दिन पाँच गोमती चक्र को पूजा-घर में स्थापित कर प्रतिदिन पूजन करने से प्रगति होती है। यदि भाग्य साथ नहीं दे रहा है तो तीन गोमती चक्र का चूर्ण बनाकर घर के बाहर छिड़कने से संकट टलता है और सौभाग्य बढ़ता है।

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