जबलपुर
भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया के इस्तीफे  से सन्न भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है, तो वहीं धीरज के समर्थक अपने नेता के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। बिना किसी तमाशे के धैर्य भाव से पार्टी कार्यालय में डेढ़ लाइन का इस्तीफा देने वाले धीरज ने स्वयं को गुप्त कर लिया है, लेकिन प्रदेश भर में फैले उनसे जुड़ी युवाओं की फौज उन पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रही है। धीरज के प्रभाव को जानने-समझने वाले भाजपा नेता समझ रहे हैं कि इस घटनाक्रम के परिणाम क्या होंगे। यही कारण है कि धीरज को मनाने की पुरजोर कोशिशें हो रहीं हैं। 

धीरज के इस्तीफे को व्यक्तिगत मामले के तौर पर नहीं अपितु प्रदेश भर के नाराज असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। दो दशकों से पार्टी  टिकट का इंतजार करने और हर बार पार्टी के कतिपय व्यापारियों की वजह से अनदेखी का शिकार बने अनेक नेता  इस इस्तीफे में स्वयं का दर्द अनुभव कर रहे हैं। नाम के अनुरूप धैर्य स्वभाव वाले धीरज  से ऐसे कदम की उम्मीद पार्टी नेतृत्व को इसलिए नहीं थी, क्योंकि धीरज जैसे नेताओं को पार्टी की अनदेखियों को देखने-झेलने और खून का घूंट पी जाने के आदी रहने वाले नेताओं के रूप में देखा जाता है।

भाजपा के टिकट वितरण के बाद पार्टी की युवा लॉबी में ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि पार्टी में युवाओं की अनदेखी आखिर क्यों की जा रही है। संयोग से भाजयुमो के एक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरदीप मौर्य ने भी भाजपा पर युवाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि ऐसे समय में जबकि कांग्रेस ने युवाओं पर पूर्ण विश्वास जताते हुए सम्मानजनक टिकटें दीं हैं, तब भाजपा की इस अकड़ के मायने आखिर क्या हैं। इस्तीफे के बाद कांग्रेस के कई बड़े नेता धीरज के संपर्क में हैं, लेकिन अभी धीरज ने किसी भी तरह के पत्ते नहीं खोले हैं। उनके स्वभाव को जानने वाले ऐसा भी कह रहे हैं कि धीरज कोई भी अनापेक्षित कदम नहीं उठाएंगे, पर युवाओं की नाराजगी से होने वाले नुकसान की बात से कोई इंकार नहीं कर रहा है।

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