उज्जैन:  महाकाल मंदिर में परंपरा के मुताबिक आज दीपावली मना ली गई। बाबा के दरबार में हर त्योहार एक दिन पहले मनाने की परंपरा है। लेकिन इस बार धार्मिक पंरपरा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पटाख़े नहीं फोड़े गए,  बल्कि  सिर्फ 4 फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व की शुरुआत की गई। देश भर में मनाए जाने वाले दीपावली पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से हुई। अनादिकाल से परम्परा चली आ रही है की कोई भी त्यौहार हो सबसे पहले महाकाल मंदिर में मनाया जाता है।  

दीपावली से एक दिन पहले ही रूप चौदस पर महाकाल मंदिर में दीपावली मनाई गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा ख़्याल रखा गया। हर साल मंदिर में भस्म आरती के दौरान ज़ोरदार आतिशबाज़ी होती थी, लेकिन इस बार प्रतीकात्म तौर पर गर्भ गृह में 4 फुलझड़ियां जलायी गई।  महाकाल मंदिर की एक और परंपरा है। परंपरा के मुताबिक रूप चौदस पर बाबा महाकाल का फलों के रस और द्रव्यों से अभिषेक कराया गया और फिर 56 भोग का अन्नकूट भी बाबा को लगाया गया। बाबा महाकाल का मनमोहक श्रृंगार किया गया। इसके बाद भस्म आरती में बाबा महाकाल के साथ दीवाली मनाई गई। मंदिर के गर्भ गृह में भस्म आरती के दौरान फुलझड़ी जलाने के साथ ही दीपावली पर्व की शुरुआत हो गई। महाकाल के दरबार में दीवाली का नज़ारा देखने हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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