बेंगलुरु 
कांग्रेस ने बेल्लारी लोकसभा क्षेत्र के अपने पुराने गढ़ में करीब 14 साल बाद जीत हासिल की है। इससे संकेत मिलता है खनिज समृद्ध जिले में रेड्डी बंधुओं का असर कम हो रहा है। बीजेपी के बेल्लारी किले को तोड़ते हुए कांग्रेस के वीएस उगरप्पा ने अपनी प्रतिद्वंद्वी जे शांता को 2,43,161 मतों से शिकस्त दी। शांता, बी श्रीरामुलु की बहन हैं। श्रीरामुलु ने मई में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद इस लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस की इस जीत के पीछे पार्टी के संकटमोचन कहे जाने वाले डीके शिवकुमार की मेहनत भी मुख्य वजह है। 

बेल्लारी पर कभी खनन उद्योग के बेताज बादशाह रेड्डी बंधुओं की जबर्दस्त पकड़ थी और यह 2004 से बीजेपी का गढ़ था। श्रीरामुलु को जनार्दन रेड्डी का करीबी माना जाता है, लेकिन मई में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उनसे दूरी बना ली थी। शांता का मुकाबला करने के लिए उगरप्पा को उतारने के कांग्रेस के फैसले ने ‘बाहरी बनाम अंदरूनी’ की बहस छेड़ दी थी। 

पार्टी के तीन बार के विधान पार्षद रहे उगरप्पा नायका (वाल्मीकि) समुदाय से आते हैं, जिसका बेल्लारी में प्रभुत्व है। वीएस उगरप्पा मूलरूप से तुमकूर के पवगाडा के रहने वाले हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि जातीय कारक और तेलुगू भाषा पर अच्छी पकड़, उनकी साफ छवि और बीजेपी की सरकार के दौरान जिले में अवैध खनन के खिलाफ प्रदर्शन से पार्टी को सियासी जंग में मदद मिली। उन्होंने कहा कि यह वही सीट है जहां 1999 में कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी और वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का आमना-सामना हुआ था जिसमें सोनिया गांधी की फतह हुई थी। 

कांग्रेस ने वरिष्ठ मंत्री डीके शिवकुमार की अगुआई में प्रचार की अच्छी रणनीति बनाई और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा समेत कई नेताओं ने प्रचार किया। उधर, बीजेपी सिर्फ श्रीरामुलु और अपने नेताओं पर निर्भर थी। उन्होंने कथित रूप से पूरे दिल से प्रचार नहीं किया। सूत्रों ने बताया कि रेड्डी बंधु, खासतौर पर जर्नादन रेड्डी के नहीं होने से बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ा। 

बीजेपी पार्टी काडर और संसाधनों का भी सही से इस्तेमाल नहीं कर पाई, जिसके कारण उसे मात खानी पड़ी। जर्नादन रेड्डी को अवैध खनन के एक मामले में बेल्लारी जिले में प्रवेश करने पर रोक है। हालांकि वह नजदीक के चित्रदुर्ग जिले के मोलाकलमुरू में डेरा डाले हुए हैं और वहीं से उन्होंने कथित रूप से निजी हैसियत से शांता के पक्ष में बेल्लारी के लोगों से संपर्क किया। 

Source : Agency