पेइचिंग 

ट्रेड वॉर के माहौल के बीच चीन के तेवर नरम पड़े हैं। चीन के उपराष्ट्रपति वॉन्ग किशान ने कहा कि अमेरिका से बातचीत के लिए चीन तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हर मुद्दे पर गंभीर चर्चा के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। हालांकि, ट्रेड वॉर पर पूर्व में चीन के तल्ख और आक्रामक रवैये की तुलना में यह अधिक नरम संकेत हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप खुले तौर पर चीन से ट्रेड वॉर की चुनौती देते रहे हैं और इसके जवाब में चीन का रुख भी अब तक जैसे को तैसा वाला ही रहा है।  
चीन के उपराष्ट्रपति ने कहा, 'हम अमेरिका के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करने और जो भी समस्या हमारे बीच है उसके समाधान के लिए चर्चा को तैयार हैं। हम एक आम सहमति का माहौल चाहते हैं ताकि दोनों तरफ से व्यापार के लिए रास्ता बन सके।' चीन के तेवरों में आई यह कमी बेवजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं। 
 
चीन को हो रहा है नुकसान 
इस साल सितंबर में आई तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था पिछले 10 साल में अपने न्यूनतम स्तर पर है। जनवरी में स्टॉक मार्केट में आई वृद्धि के बाद सितंबर तक में फिर से मंदी नजर आ रही है। डॉलर की तुलना में चीन की मुद्रा भी कमजोर है और राज्य की तरक्की का प्रमुख चिह्न समझे जानेवाले इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश के आंकड़ों में भी कमी आई है। 

चीन के भविष्य पर लगा है प्रश्नचिह्न 
चीन के माइक्रोचिप इंडस्ट्री पर अमेरिका ने काफी बड़ा आघात किया है। ट्रंप प्रशासन ने पेइचिंग पर 200 बिलियन डॉलर का टैरिफ लगाया तो उसके जवाब में चीन ने भी 60 बिलियन डॉलर का टैरिफ लगाया। हालांकि, वार-प्रतिवार के इस सिलसिले में अमेरिका ने चीन पर यूएस की मेमरी चिफ फर्म माइक्रोन से चोरी का भी आरोप लगा दिया। चीन की राज्य समर्थित माइक्रो चिप फुजिअन जिन्हुआ और इसके ताइवनीज पार्टनर पर अमेरिका ने बौद्धिक संपदा (इंटिलैक्चुअल प्रॉपर्टी) की चोरी का आरोप लगाया है। 
 

Source : Agency