ओंकारेश्वर।

चुनावी समर में उतरने वाले प्रत्याशी प्रचार और अन्य कार्य शुरू करने से पहले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचकर शीश नवाते हैं। श्रद्धा भाव के साथ-साथ इसे लेकर क्षेत्र में किवदंतियां भी सुनाई पड़ती हैं। बुजुर्ग किस्सों में पुराने राजनेताओं का उदाहरण भी देते हैं कि ओंकारेश्वर के पास से गुजरे लेकिन दर्शन करने नहीं पहुंचे तो कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।

मांधाता विधानसभा के मुख्य नगर ओंकारेश्वर में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्रसिंह तोमर और कांग्रेस प्रत्याशी नारायण पटेल भगवान का आशीर्वाद ले चुके हैं। देश या प्रदेश में होने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनाव के पहले दर्जनों नेता ज्योतिर्लिंग पर शीश नवाने जरूर पहुंचते हैं। जो नहीं आता वह ज्यादा दिन कुर्सी पर नहीं रह पाता। ओंकारेश्वर क्षेत्र में इस तरह के कई किस्से बुजुर्ग सुनाते हैं।

उमा भारती को ओंकारेश्वर से विशेष लगाव : मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का ओंकारेश्वर से विशेष लगाव होने के बाद भी वे ओंकारेश्वर नहीं पहुंचीं। दो वर्ष तक मुख्यमंत्री रहते हुए वे भी अनेक बार महेश्वर, सनावद, बड़वाह से निकल गईं लेकिन ओंकारेश्वर नहीं आईं। उन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा।


1989 में वेंकटरमण पहुंचे थे ओंकारेश्वर : भगवान आदिगुरु शंकराचार्य के गुरु गोविंदपदाचार्य की गुफा के जीर्णोद्धार के भूमिपूजन के दौरान वर्ष 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकटरमण ने भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर में ही किया था।

ये किस्से है प्रसिद्ध

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- वर्ष 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ग्राम मोरटक्का में सभा लेने पहुंची थीं। लेकिन वे मंदिर नहीं पहुंचीं। परिणाम स्वरूप उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ा।

- प्रधानमंत्री रहते राजीव गांधी भी सनावद में सभा लेकर निकल गए। वे भी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने नहीं गए और उनकी भी सरकार चली गई।


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- वर्ष 2002 में तत्कालीन पीएम अटलबिहारी वाजपेयी ओंकारेश्वर बांध का भूमिपूजन करने पहुंचे थे। वे भी दर्शन करने नहीं पहुंचे और सत्ता चली गई। 

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