रायपुर। 

छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव के पहले चरण की सात हाईप्रोफाइल सीट पर दिग्गजों की साख दांव पर है। राजनांदगांव, नारायणपुर, बीजापुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, दंतेवाड़ा और कोंटा में दिग्गज नेताओं को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा मुकाबला राजनांदगांव में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी व कांग्रेस प्रत्याशी करुणा शुक्ला के बीच है।

अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु के बाद भाजपा ने अटल विजन पत्र को रखकर 2022 के नवा छत्तीसगढ़ का वादा कर रही है, तो करुणा शुक्ला अटल बिहारी के अस्थि कलश के अपमान को मुद्दा बनाकर मैदान में है। मुख्यमंत्री ने नामांकन में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की सभा कराकर माहौल बनाने की कोशिश की, तो करुणा शुक्ला के पक्ष में अब तक एक दर्जन स्टार प्रचारकों की सभा हो चुकी है। यहां मतदाताओं को अटल की भाजपा और अटल की भतीजी में से किसी एक को चुनना है।

नारायणपुर में मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस के चंदन कश्यप से मुकाबला है। पिछले चुनाव में भी दोनों के बीच मुकाबला था। इसमें केदार को 12 हजार 800 वोट से जीत मिली थी। पिछले 15 साल से सरकार में मंत्री रहे केदार को घेरने के लिए कांग्रेस स्थानीय मुद्दे उठा रही है। वहीं जकांछ-बसपा गठबंधन के बलिराम कचलाम भी टक्कर को रोमांचक बनाए हुए हैं। बीजापुर में मंत्री महेश गागड़ा की टक्कर कांग्रेस के विक्रम मंडावी से हैं। पिछले चुनाव में मंडावी ने गागड़ा को कांटे की टक्कर दी थी।

नक्सली हमलों के बीच बीजापुर सीट सुर्खियों में बनी हुई है। भाजपा ने अपने बागियों को मनाने में सफलता पाई है, लेकिन भीतरघात की आशंका ने संगठन को सक्रिय कर दिया है। आला नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं झारखंड के नेताओं ने भी डेरा डाला है।

कोंटा से चार बार के विधायक कवासी लखमा का मुकाबला भाजपा के धनीराम बारसे से है। पिछले चुनाव में दोनों के बीच कांटे का मुकाबला था। इस बार यहां से सीपीआइ के मनीष कुंजाम ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। बस्तर की कोंटा एकमात्र सीट है, जहां कांग्रेस को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा।


अंतागढ़ में भाजपा ने विधायक भोजराज नाग का टिकट काटकर सांसद विक्रम उसेंडी को मैदान में उतारा है। यहां से उसेंडी लगातार जीतते आए हैं। कांग्रेस ने पहली बार चुनाव मैदान में उतरे अनूप नाम पर भरोसा जताया है। अंतगाढ़ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पंवार ने नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद इस सीट की पूरे देश में चर्चा रही।

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