इंदौर।

 राजवाड़ा स्थित महालक्ष्मी मंदिर 186 साल से शहर के लोगों के बीच आस्था का केंद्र है। यहां हर साल दीपावली पर पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

उनके श्रंगारित स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं और सुख-समृद्धि व वैभव की कामना की जाती है। मंदिर आज जैसा नजर आ रहा है, पहले ऐसा नहीं था।

मंदिर का निर्माण मल्हारराव होलकर (द्वितीय) ने 1832 में करवाया था। 1933 में यह मंदिर तीन तल वाला था। इसका एक बड़ा हिस्सा 1942 में आग की भेंट चढ़ गया। इसके बाद इसका पुन: जीर्णोद्धार किया गया।
 
तब इस मंदिर को लकड़ी से बनाया गया और चद्दरों से ढंका गया था। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार खासगी ट्रस्ट द्वारा करीब 10 साल पहले अतिक्रमण हटाकर पुन: जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया था, जो करीब तीन साल पहले पूरा हो गया था। होलकरकालीन इस मंदिर के बाहरी स्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए किशनगढ़, राजस्थान से खास लाल पत्थर मंगवाए गए थे।

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