नई दिल्ली

 8 नवंबर का दिन देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक खास दिन के तौर पर दर्ज है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी दिन रात 8 बजे दूरदर्शन के जरिए देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने का ऐलान किया था। मोदी के इस ऐलान के बाद पूरा देश स्तब्ध रह गया था क्योंकि किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी थी। जब बताया गया कि प्रधानमंत्री 8 वमबर को पूरे राष्ट्र को संबोधित करेंगे तो माना जा रहा था कि मोदी को बड़ी घोषणा करने जा रहे हैे लेकिन किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि पुराने नोट रातों रात बंद कर दिए जाएंगे।
 नोटबंदी की यह घोषणा 8 नवंबर की रात से लागू हो गई थी। इससे कुछ दिन देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। हालांकि कुछ ही दिनों में 500 और 2000 के नए नोट जारी किए गए। सरकार ने ऐलान किया कि उसने देश में मौजूद काले धन और नकली मुद्रा की समस्या को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। देश में इससे पहले 16 जनवरी 1978 को जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने भी इन्हीं कारणों से 1000, 5000 और 10,000 रुपए के नोटों का विमुद्रीकरण किया था।
 
विपक्ष ने पीएम मोदी के इस कदम की कड़ी आलोचना की थी और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार देश को कई दशक पीछे ले गई, हालांकि धीरे धीरे अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई। जनता ने भी मोदी के फैसले में पूरा सहयोग किया था।

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