नीमच
जिले के तीनों विधानसभा सीट के कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी घोषित हो चुके है। कांग्रेस ने नीमच से सत्यनारायण पाटीदार, मनासा उमरावसिंह गुर्जर और जावद से राजकुमार अहीर को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार पिछड़ा वर्ग के है। भाजपा ने नीमच से दिलीपसिंह परिहार, मनासा माधव मारू और जावद से ओमप्रकाश सखलेचा पर भरोसा जताया है। ये तीनो उम्मीदवार सवर्ण समाज से ताल्लुकात रखते है। दो वैश्य है तो एक क्षत्रिय। 

जिले में पिछड़ा वर्ग के मतदाता ज्यादा है इसके बाद भी भाजपा ने ओबीसी की अनदेखी की। इस वर्ग से दावेदारी करने वालो में नीमच से पूर्व विधायक स्वर्गीय खुमानसिंह शिवाजी के पुत्र सज्जनसिंह चौहान, पवन पाटीदार भी दौड़ में शामिल थे। पार्टी ने नजरअंदाज किया। सूत्रों का कहना है इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। मनासा में वैश्य समाज के माधव मारु को टिकट दिया जबकि बड़ी तादाद में ओबीसी वर्ग भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक है। यहाँ से मंडी अध्यक्ष बंसीलाल गुजर समेत कई दावेदार थे। उन्हें दरकिनार करके सवर्ण वर्ग के उम्मीदवार को मैदान में उतारा। इससे ओबीसी वर्ग अंदर ही अंदर आहत है। 

यहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरेंद्र कुमार सखलेचा ने 8 चुनाव लड़े 3 चुनाव हारे और 5 जीते। अब 15 साल से उनके बेटे ओमप्रकाश सखलेचा विधायक है और  चौथी बार भी चुनाव लड़ रहे है। विधायक सखलेचा की खास बात यह रही कि इन्होंने अपने समकक्ष किसी दूसरे नेता को आगे बढ़ने नहीं दिया और यही कारण है 40 साल से एक ही परिवार चुनाव लड़ रहा है। अभी  2018 के चुनाव में जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पूरन अहीर ने  भाजपा से दावेदारी की लेकिन आलाकमान उन्हें टिकट नहीं दिया। अहीर ओबीसी वर्ग से आते है।

सबसे खास बात यह है कि कांग्रेस ने दो पूर्व जनपद अध्यक्ष को टिकट दिया-मनासा से उम्मीदवार उमरावसिंह गुर्जर नीमच जनपद अध्यक्ष रहे है। वही नीमच  विधानसभा से  कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण पाटीदार जावद जनपद पंचायत अध्यक्ष रहे है।

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