नई दिल्ली
खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में गए 10 भारतीय हर रोज जान गंवा रहे हैं। इस बात का खुलासा सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में हुआ है। इस हिसाब से छह खाड़ी देशों में कमाई से भारत भेजा गया हर 1 अरब डॉलर (करीब 70 अरब रुपये) 117 इंडियन की जान की कीमत पर आ रहा है। 
 
सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश नायक के आरटीआई इंटरवेंशन ऐंड रिसर्च ने बताया है कि 2012 से 2018 के बीच बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में 24,570 इंडियन वर्कर्स की मौत हुई है। सबसे ज्यादा 10,416 मौतें सऊदी अरब में हुई हैं जबकि इस लिस्ट में 1,317 के साथ सबसे नीचे बहरीन रहा है। साल के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा मौतें 2015 में हुईं, जब 4,702 वर्कर्स की जान गई, 2012 में सबसे कम 2,375 का आंकड़ा रहा। 

खाड़ी देशों के सभी भारतीय दूतावास आरटीआई के तहत मौतों से जुड़े डेटा मुहैया कराने में तत्पर नहीं नजर आए। कुवैत, बहरीन, ओमान कतर और सऊदी अरब ने डेटा मुहैया कराए हैं, जबकि UAE ने सेक्शन 8(1)J का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया। इस सेक्शन के तहत निजी सूचना नहीं जारी करने की छूट होती है। सिर्फ कतर के भारतीय दूतावास ने मौतों की वजह के बारे में भी बताया। इस खाड़ी देश में हुई 80% मौतों की वजह प्राकृतिक रहीं जबकि 14% मामले एक्सीडेंट और 6% खुदकुशी के रहे। 

दुनियाभर में काम कर रहे भारतीयों ने 2012 से 2017 के बीच जितनी रकम भारत भेजी, उनमें आधे से ज्यादा का योगदान खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों का था। इस दौरान ग्लोबल रेमिटेंस कुल $410.33 अरब रहा जबकि खाड़ी देशों में काम करने वाले इंडियन वर्कर्स का हिस्सा $209.07 अरब रहा। वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, खाड़ी देशों में यूएई से सबसे ज्यादा $72.30 अरब की रकम इंडिया भेजी गई, जबकि सऊदी अरब $62.60 अरब के साथ दूसरे नंबर पर रहा। लिस्ट में इनके बाद कुवैत ($25.77 अरब); कतर ($22.57 अरब); ओमान ($18.63 अरब) और बहरीन $7.19 अरब रहा। 

खाड़ी देशों में काम करने वाले इंडियन वर्कर्स की मौत से जुड़े जो आंकड़े आरटीआई के जरिए मिले हैं, उनकी तुलना संसदीय आंकड़ों से किए जाने पर पता चला कि 2012-17 के दौरान ओमान में कमाए हर एक अरब डॉलर पर 187 भारतीय श्रमिकों जान गई। इस दौरान बहरीन से 1 अरब डॉलर कमाकर भारत भेजने वालों में 183 ने परदेस में जान गंवा दी, जबकि सऊदी अरब में भारतीयों की हर 1 अरब डॉलर की कमाई पर 162 वर्कर की मौत का आंकड़ा सामने आया। 

जहां तक कतर की बात है, तो वहां से एक अरब डॉलर कमाकर इंडिया भेजने वाले 74 वर्कर्स की मौत हुई, जबकि यूएई में हर 1 अरब डॉलर की कमाई में 71 भारतीयों की जान गई। 2012-17 में इंडियन वर्कर्स की तरफ से स्वदेश भेजी गई सर्वाधिक रकम $72.3 अरब रही, लेकिन वहां हर 1 अरब डॉलर के रेमिटेंस के मुकाबले मरने वाले भारतीय श्रमिकों की संख्या सबसे कम 71 रही। प्रति एक अरब डॉलर रेमिटेंस के मुकाबले मौतों के मामले में बहरीन 183 के आंकड़े के साथ दूसरे नंबर पर रहा। 
 

Source : Agency