भोपाल

भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम का पर्व भाईदूज आज मनाया जाएगा। इस पर्व पर बहनें भाइयों की लंबी उम्र की कामना को लेकर उपवास भी रखेंगी। बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर बजरी खिलाने के बाद ही उपवास तोड़ेंगी। इसी दिन भगवान चित्रगुप्त पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। इस दिन चित्रगुप्त की पूजा के साथ कलम-दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा की जाती है।

भाईदूज का पर्व शुक्रवार को बड़े ही उत्साह और हर्षाल्लास के साथ मनाया जाएगा। बहनें अपने भाइयों की सलामती, दीर्घायु और सुख-समृद्घि के लिए उपवास रखेंगी। बहनें भगवान यमराज की पूजा-अर्चना कर भाइयों को तिलक कर मिठाई खिलाएंगी। इसके बाद उपवास तोड़ेंगी। इस दिन बहनें भाई के कल्याण और वृद्घि की इच्छा से उनकी हथेलियों की पूजा करती हैं।
 
पं. दीपेश पाठक ने बताया कि वणिक वर्ग के लिए यह नवीन वर्ष का प्रारंभिक दिन कहलाता है। इस दिन नवीन बहियों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त का पूजन लेखनी के रूप में किया जाता है। इस दिन यमुनाजी के पूजन का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भाईदूज के दिन जो भाई अपने घर पर ही भोजन करता है उसे दोष लगता है। यदि बहन के घर जाना संभव न हो तो किसी नदी के तट या गाय को अपनी बहन मानकर उसके समीप भोजन करना चाहिए।
 
उन्होंने बताया कि भाईदूज के दिन यदि बहन (चचेरी, ममेरी, फुफेरी कोई भी हो) अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। भाईदूज के दिन बहनें अपने भाई को निमंत्रित कर उन्हें अपने हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन कराए और तिलक करें। भोजन के बाद अपने भाई को ताम्बूल (पान) भेंट करें। मान्यता है कि पान भेंट करने से बहनों का सौभाग्य अखंड रहता है।

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