मध्य प्रदेश की सियासी बिसात पर कांग्रेस ने अंतिम मौके पर एक बड़ा दांव खेला है. शिवराज सिंह चौहान को उनके ही घर में घेरने के लिए कांग्रेस ने भाजपा का 15 साल पुराना तरीका अपनाया है. कांग्रेस ने बुधनी विधानसभा से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को उम्मीदवार बनाया है. 2003 में भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को घेरने के लिए इसी तरह शिवराज सिंह चौहान को उनके खिलाफ चुनावी जंग में उतारा था.

दरअसल, बुधनी विधानसभा से अंतिम दौर तक कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर कयास लगाए जा रहे थे. पहले दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय का नाम सुर्खियों में था. उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने के पहले सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह के भी बुधनी से चुनावी समर में उतरने की अटकलें लगाई जा रही थी, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने चौंकाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कुछ समय पूर्व ही प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए अरुण यादव के नाम पर मुहर लगा दी.

जानकार बताते है कि शिवराज सिंह चौहान को उनके ही घर में घेरने की रणनीति के तहत कांग्रेस ने यह दांव खेला है. इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रदेश में भाजपा के पास शिवराज से बड़ा कोई चेहरा नहीं है. ऐसे में कांग्रेस की रणनीति है कि शिवराज को प्रचार के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त बुधनी के लिए देना पड़े.

शिवराज के करियर की दो बड़ी हार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 13 साल पूरे करने वाले शिवराज सिंह चौहान को अपने राजनीतिक करियर में दो बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में उन्हें विक्रम वर्मा के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी थी. 2003 विधानसभा चुनाव में वह दिग्विजय सिंह को हराने में नाकाम रहे थे.

दबंग पिता के बेटे से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार दिवंगत सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव ने 2004 लोकसभा चुनाव में में खरगोन सीट से भाजपा के दिग्गज नेता भाजपा के कृष्णमुरारी मोघे को 1 लाख, 18 हजार वोटों से हरा दिया था. 2009 के चुनाव में उन्होंने खरगोन के बजाए खंडवा से चुनाव लड़ा और चार बार के सांसद रहे नंदकुमारसिंह चौहान को करारी शिकस्त दी. 2014 में कांग्रेस की करारी हार के बाद अरुण यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था.

Source : Agency