वॉशिंगटन 

अमेरिका और चीन ट्रेड वॉर से बढ़ते तनाव के बीच पटरी से उतरी शीर्ष स्तर की वार्ता को एक महीने के बाद शुक्रवार को फिर से शुरू कर रहे हैं। इस बातचीत में व्यापार और सैन्य मुद्दों के विवाद को शांत करने को लेकर चर्चा हो सकती है। बता दें कि विश्व की 2 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। चीन पर इसका बुरा असर दिखने भी लगा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही, जो पिछले 9 साल की सबसे धीमी दर है। 
 
वॉशिंगटन में होने वाली यह बैठक ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक सप्ताह बाद अर्जेंटीना में जी-20 समिट से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की उम्मीद की जा रही है। 

दोनों ही पक्षों को बातचीत में प्रगति की उम्मीद है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री जिम मैटिस की शुक्रवार को चीन के 2 उच्च अधिकारियों से मुलाकात होनी है। इससे पहले पिछले महीने अमेरिका और चीन के बीच शीर्ष वार्ता खटाई में पड़ गई थी। पिछले महीने मैटिस को पेइचिंग का दौरा करना था लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने की वजह से यह कार्यक्रम रद्द हो गया था। लेकिन इस बार चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेइ फेंग अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन पहुंच रहे हैं। 

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो की शुक्रवार को कम्युनिस्ट पार्टी के अहम अधिकारी यांग जीची के साथ मुलाकात होगी फिर दोनों संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। बता दें कि यांग जीची की लंबे वक्त तक चीन की विदेश नीति को तय करने में अहम भूमिका रही है और वह पूर्व में वॉशिंगटन में राजदूत के तौर पर सेवा दे सकते हैं। 

बातचीत का फोकस भले ही सुरक्षा पर होगा लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के केंद्र में व्यापार का मुद्दा प्रमुख है। बता दें कि कि ट्रंप ने पेइचिंग पर व्यापार के मामले में बेइमानी का आरोप लगाते हुए चीनी सामानों पर 250 अरब डॉलर मूल्य के टैरिफ (शुल्क) लगा दिए थे। इसके बाद बदले की कार्रवाई के तहत चीन ने भी अमेरिकी सामानों की टैरिफ लिस्ट बढ़ा दी है। 

हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन की तरफ से चीन पर कई सख्त टिप्पणियां सुनने को मिली हैं। विशेषज्ञों ने इसे शीत युद्ध के समानांतर बताया है। पेइचिंग में अमेरिका के राजदूत टेरी ब्रैनस्टैड का कहना है कि वॉशिंगटन तनाव नहीं चाहता। उन्होंने गुरुवार को कहा, 'हम चाहते हैं कि चीन के साथ संबंध रचनात्मक और परिणामोन्मुख हों। अमेरिका चीन को सीमित करना नहीं चाहता लेकिन हम अच्छा व्यवहार चाहते हैं।' 

बता दें कि अमेरिका और चीन में व्यापार के साथ-साथ कुछ सैन्य मुद्दों पर भी गहरे मतभेद सामने आए हैं। अमेरिका विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का विरोध कर रहा है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने उइगर मुसलमानों पर चीन के अत्याचार को मानवाधिकारों का हनन बताया है। अमेरिका यह भी चाहता है कि चीन उत्तर कोरिया के साथ बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। 

Source : Agency