नई दिल्ली

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी की कोई मांग नहीं कर रही है, बल्कि केवल आरबीआई की आर्थिक पूंजी ढांचा (इकनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क) तय करने के बारे में चर्चा कर रही है। ध्यान रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 5 नवंबर को इंडियन एक्सप्रेस की खबर को ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों पर तंज कसा था। राहुल ने कहा था कि प्रधानमंत्री को अपने विलक्षण आर्थिक ज्ञान के कारण फैली अव्यवस्था को ठीक करने के लिए अब रिजर्व बैंक से 3.60 लाख करोड़ रुपये की बड़ी राशि की जरूरत पड़ गई है। 
 
अब वित्त मंत्रालय में आर्थिक विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ट्वीट में कहा, 'मीडिया में गलत जानकारी वाली तमाम अटकलबाजियां जारी हैं। सरकार का राजकोषीय हिसाब-किताब बिल्कुल सही चल रहा है। अटकलबाजियों के विपरीत सरकार का आरबीआई से 3.6 या एक लाख करोड़ रुपये मांगने का कोई प्रस्ताव नहीं है।' 
 

गर्ग ने कहा कि इस समय 'केवल एक प्रस्ताव पर ही चर्चा चल रही है और वह है- रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी की व्यवस्था तय करने की चर्चा।' आर्थिक मामलों के सचिव ने विश्वास जताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे (रेवेन्यू डेफिसिट) को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने के बजट में तय लक्ष्य के भीतर बनाए रखने में कामयाब होगी। 
 
गर्ग ने कहा कि सरकार का राजकोषीय हिसाब-किताब ठीक चल रहा है।' उन्होंने कहा, 'वर्ष 2013-14 में सरकार का वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) जीडीपी के 5.1 प्रतिशत के बराबर था। उसके बाद से सरकार इसमें लगातार कमी करती आ रही है। हम वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में वित्तीय घाटे को 3.3 तक सीमित कर देंगे।' उन्होंने राजकोषीय लक्ष्यों को लेकर अटकलों को खारिज करते हुए कहा, 'सरकार ने दरअसल बजट में इस साल बाजार से कर्ज जुटाने का जो अनुमान रखा था उसमें 70000 करोड़ रुपय की कमी स्वयं ही कम कर दी है।' 

Source : Agency