सैन फ्रांसिस्को

गूगल ने यौन उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई के लिए पॉलिसी में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक कंपनी की मध्यस्थता जरूरी नहीं होगी बल्कि यह पीड़ित की इच्छा पर निर्भर करेगा। यानी कर्मचारी चाहें तो सीधे कोर्ट जा सकेंगे। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को कर्मचारियों को ईमेल भेजा। पिचाई ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में उन्हें कर्मचारियों का फीडबैक मिला है। यह महसूस किया गया कि हमेशा पूरी जानकारी नहीं मिल पाई। पिचाई ने कर्मचारियों से माफी भी मांगी। यौन उत्पीड़न के मामलों में गूगल अब कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देगा। सभी विभागों में ऐसे कितने मामले सामने आए और क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में भी बताया जाएगा।
 
गौरतलब है कि महिला कर्मियों द्वारा की गई शिकायत के बाद कैब सेवा प्रदाता उबर कंपनी ने भी कुछ ऐसे ही बदलाव किए थे। कंपनी की आंतरिक जांच में पता चला कि उसके कई कर्मी यौन उत्पीडऩ के शिकार हुए हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने कंपनी के कर्मियों को भेजे एक ई-मेल में कहा कि गूगल के वरिष्ठ अधिकारियों (लीडरों) और मैंने आपकी प्रतिक्रिया सुनी है और आपकी ओर से साझा की गई बातों से काफी प्रभावित हुआ हूं।
 
यौन उत्पीड़न के मामलों में कमी लाने के लिए गूगल अब हर साल कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगा। अब तक एक साल के अंतराल पर प्रशिक्षण दिया जाता था। सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को सालाना ट्रेनिंग में शामिल होना जरूरी होगा। इसमें पिछड़ने पर उन्हें वेतन बढ़ोतरी और प्रमोशन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, गूगल ने समान कार्य के लिए महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन की मांग पूरी नहीं की है। पिछले हफ्ते गूगल के करीब 20 हजार कर्मचारियों ने दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इनकी मांग थी कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पारदर्शी नीति बनाई जाए। मध्यस्थता की अनिवार्यता खत्म की जाए।
 

Source : Agency