हिंदु धर्म में तुलसी काे सबसे पवित्र पाैधा माना गया है। वास्तव में यही एक एेसा पदार्थ है, जाे पूजा में एक बार प्रयुक्त हाेने के पश्चात फिर से धाेकर प्रयाेग में लाया जा सकता है क्याेंकि इसकाे आत्मशुद्धि करने वाला माना जाता है। जो व्यक्ति यह चाहता है कि उसके घर में सदैव शुभ कर्म हो, सदैव सुख शांति का निवास रहे, उसे तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए। कहते हैं कि जिस घर में शुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी हरी-भरी रहती है। कार्तिक मास में तुलसी लगाना सबसे शुभ कर्म माना गया है। 

अपने घर में एक तुलसी का पौधा जरूर लगाएं। इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्वी दिशा में लगाएं या फिर घर के सामने भी लगा सकते हैं। पारंपरिक ढंग के बने मकानों में रहने वाले ज्यादा सुखी और शांत रहते थे। इसका एक बड़ा कारण तुलसी चौरा, क्यारी और वहां सुबह के वक्त चढ़ाया जाने वाले जल के अलावा शाम के समय रखा गया दीप होता था।

मान्यता है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती, अन्य बुराइयां भी घर और घरवालों से दूर ही रहती हैं। सबसे बड़ी बात ये पौधा धन देता है।

तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

कार्तिक माह में विष्णु जी का पूजन तुलसी दल से करने का बडा़ ही माहात्म्य है। कार्तिक माह में यदि तुलसी विवाह किया जाए तो कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। 

पदम पुराण में कहा गया है की तुलसी जी के दर्शन मात्र से सम्पूर्ण पापों की राशि नष्ट हो जाती है,उनके स्पर्श से शरीर पवित्र हो जाता है,उन्हें प्रणाम करने से रोग नष्ट हो जाते हैं, सींचने से मृत्यु दूर भाग जाती है, तुलसी जी का वृक्ष लगाने से भगवान की समीपता प्राप्त होती है और उन्हें भगवान के चरणों में चढ़ाने से मोक्ष रूप महान फल की प्राप्ति होती है। अंत काल के समय तुलसीदल या आमलकी को मस्तक या देह पर रखने से नरक का द्वार बंद हो जाता है।

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