ग्वालियर
प्रदेश अलग-अलग जिलों में देशी शराब का निर्माण से लेकर भराई और सप्लाई करने वाले कई डिस्टलर्स पर आबकारी आयुक्त ने करोड़ों रूपए जुर्माना ठोका है। यह वे डिस्टलर हैं, जिनके देशी शराब के गोदामों में स्टॉक की निर्धारित मिनिमम लिमिट से कम माल पाया गया। स्टॉक कम के संबंध में डिस्टलर्स से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। इस पूरे मामले को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

चुनाव में वोटर्स को बांटने के लिए देशी शराब की डिमांड बढ़ जाता है। इस बार भी देशी शराब की ज्यादा खपत हुई है। ऐसी आशंका है कि इन डिस्टलर्स ने मुनाफा कमाने के लिए प्रत्याशियों के यहां बॉटनिंग यूनिट से ही सीधे शराब भेज दी हो,इसलिए गोदाम तक स्टॉक समय पर नहीं पहुंचा। जिस कारण गोदामों में मिनिमम से कम स्टॉक पाया गया। हालांकि यह जांच का विषय है। जिसकी आबकारी विभाग के अपने स्तर पर पड़ताल करा रहा है। 

बता दें कि ग्वालियर सहित प्रदेश के जिन जिलों में देशी शराब के गोदाम हैं,वहां से प्रतिदिन जितनी भी शराब ठेकेदारों को सप्लाई की जाती है। उसका पूरा हिसाब संबंधित गोदाम का प्रभारी आबकारी अधिकारी अपने पास रखता है। बॉटलिंग यूनिट से जितना माल गोदाम में आता है,और फिर वहां से ठेकेदारों को दिया जाता है,उसकी हर दिन रिपोर्ट आबकारी आयुक्त क पास भेजी जाती है। 

गोदाम के अंदर कम से कम कितना स्टॉक हर समय उपलब्ध रहना चाहिए,इसका भी निर्धारण कर रखा है। यह संबंधित डिस्टलर्स को मैटेंन करना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं होने पर जुर्माना वसूला जाता है। चुनाव के चलते गोदामों पर आबकारी आयुक्त ने निगरानी बढ़ा दी थी। वहां से स्टॉक संबंधी प्रतिदिन की जो रिपोर्ट प्राप्त हो रहीं थीं,उसकी जांच की जा रही थी। इस दौरान प्रदेश के कई जिलों के गोदामों में मिनिमत लिमिट से कम स्टॉक  पाया। जिसे गंभीरता से लेकर संबंधित डिस्टलर्स पर मोटा जुर्माना ठोका गया है। 

Source : Agency