अभिनेत्री अनुष्का शर्मा इन दिनों अपनी रिलीज़ के लिए तैयार फिल्म 'जीरो' के प्रमोशन में जुटी हैं। अपनी फिल्म 'जीरो' में अपने किरदार के बारे में अनुष्का बताती हैं, 'मुझे शुरू से ही पता था कि मेरा किरदार सेरब्रल पॉल्ज़ी की समस्या से जूझ रहा है और एक अलग तरह की हरकत भी थी बॉडी, जो मुझे खुद क्रिएट करना पड़ता था। जब मैं शॉट दे रही होती थी तब मुझे डायलॉग याद रखने के साथ-साथ सेरब्रल पॉल्ज़ी के दौरान बॉडी और फेस में होने वाली मसल्स की हरकत पर बहुत ध्यान देना होता था।'

'मैं परफेक्ट शॉट के लिए कई बार ज्यादा रीटेक भी करती थी। इस किरदार को निभाते समय शुरू में बहुत स्ट्रगल था, मैंने तीन महीने तक सेरब्रल पॉल्ज़ी को अच्छी तरह समझने के लिए खूब पढ़ती थी। मैंने कई विशेषज्ञों के साथ काम किया था। मेरे किरदार दिमाग बहुत तेज है, उसने प्रफेशनली बहुत कुछ अचीव किया है। उसकी वह स्पिरिट खो नहीं सकती। वही उसकी खूबसूरती भी है। एक ऐक्टर के तौर पर हम हमेशा ऐसे कठिन किरदार की तलाश करते रहते हैं, मैं खुशनसीब हूं कि मुझे ऐसे किरदार एक के बाद एक मिल रहे हैं।'

'आनंद ने जब यह किरदार मुझे सुनाया था, मुझे चैलेंजिंग लगा था। अब मेरी पिछली फिल्में देख लीजिए परी में मैं क्या बनी थी या उसके बाद आई फिल्म में भी मेरा किरदार बहुत चैलेंजिंग था। अब मुझे लेकर बहुत से निर्देशक कॉन्फिडेंट हैं कि मेरे पास वह किसी भी तरह का मुश्किल रोल बेहिचक ला सकते हैं।'

किरदार निभाते वक्त जब बातचीत हुई तो अनुष्का को पता चला कि दिव्यांग लोगों के लिए भारत में सुविधाएं बहुत कम हैं। वह बताती हैं, 'मैंने जब किरदार की तैयारी की शुरुआत की थी तब बहुत सारे डॉक्टर्स को यह जानने के लिए मिली थी कि सेरब्रल पॉल्ज़ी जैसी तकलीफ से जूझ रहे लोगों के साथ किस तरह की तमाम प्रॉब्लम्स होती हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि हमारे देश में हर जगह विकलांग व्यक्तियों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। हम ऐक्टर जब कोई ऐसा किरदार निभाते हैं तो उस दौरान किरदार से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है। हम फिल्मों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर सकते हैं।'

'जिंदगी में एक ऐसा समय भी आता है, जब व्यक्ति खुद को शून्य में महसूस करता है, अभी तक मेरी लाइफ में ऐसा समय नहीं आया है, जब मैंने ऐसा फील किया हो कि मैं जीरो हूं। अब मुझे वह स्थति महसूस करनी है, क्योंकि जब आप अपनी जिंदगी में जीरो की स्थति में होंगे तो कहीं भी जा सकते हैं। जीरो से ही सब कुछ निकला है, बाद में सब जीरो में ही चला भी जाता है, मेरी यह बातें बड़ी फिलॉसफी वाली लग रही होंगी, लेकिन जिंदगी की सच्चाई यही है। आपको हमेशा ऐसा फील करना चाहिए कि अपनी स्थति का पता न हो, तभी आप आगे बढ़ते रहेंगे और नई-नई शुरुआत भी करेंगे।'

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