ऐडिलेड 

चेतेश्वर पुजारा ने वह किया जो उन्हें सबसे बेहतर आता है, विकेट पर टिकना। ऐडिलेड टेस्ट के पहले दिन भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। लेकिन पुजारा अपना काम करते रहे। वह गेंदबाजों को थकाते रहे। और अपनी गति से रन बनाते रहे। ऑस्ट्रेलिया का कोई गेंदबाज उन्हें आउट नहीं कर पाया। अंत में वह 123 रन बनाकर रन आउट हुए। दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 9 विकेट के नुकसान पर 250 रन बना लिए हैं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से सभी मुख्य गेंदबाजों (मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, पैट कमिंस और नाथन लायन) ने दो-दो विकेट लिए।


विकेट बल्लेबाजी के लिए अच्छा है, अगर यहां पहला सेशन संभलकर खेल लिया जाए तो उसके बाद यहां रन बरसते हैं- मैच से पहले ब्रेंडन जूलियन ने ऐडिलेड के विकेट के बारे में यही कहा था। लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने शायद इस सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। उनका शॉट सिलेक्शन खराब रहा। हालांकि पहले सेशन में चार विकेट गंवाने के बाद, चेतेश्वर पुजारा के नेतृत्व में भारत ने अपनी पारी काफी हद तक संभाल ली। चेतेश्वर पुजारा और रविचंद्रन अश्विन के 62 रनों की साझेदारी ने भारतीय पारी को काफी राहत दी। 
  

चेतेश्वर पुजारा की टेस्ट करियर की 16वीं सेंचुरी की बदौलत भारत ने ऐडिलेड टेस्ट के पहले दिन 9 विकेट पर 250 रन बना लिए हैं। भारतीय टीम एक समय पर 41 रन पर 4 विकेट खोकर संकट में थी। लेकिन पुजारा ने अपना संयम नहीं खोया और वह विकेट पर टिके रहे। वह आउट होने वाले दिन के अंतिम बल्लेबाज रहे और 123 बनाकर रन आउट होकर पविलियन लौटे। उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ काफी रन जोड़े।

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। लेकिन टीम इंडिया की शुरुआत वैसी नहीं रही जैसी कप्तान को उम्मीद रही होगी। दिन के दूसरे ही ओवर में लोकेश राहुल 2 रन बनाकर जोश हेजलवुड की गेंद पर अनमना सा शॉट खेलकर तीसरी स्लिप में आरोन फिंच के हाथों लपके गए। मुरली विजय (11) रन बनाकर मिशेल स्टार्क की गेंद पर बल्ला अड़ा बैठे और विकेटकीपर टिम पेन ने उनका कैच लपकने में कोई गलती नहीं की।


जब 11 रनों पर भारत के दोनों सलामी बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे। तब बैटिंग पर उतरे विराट कोहली। कोहली से भारतीय खेमे को बड़ी उम्मीद थी लेकिन आज उनका दिन नहीं था। 3 के निजी स्कोर पर पैट कमिंस ने अपने पहले ही ओवर में भारतीय कप्तान को आउट कर दिया।

ऑफ साइड में शॉट खेलने के प्रयास में गेंद हवा में गई और गली में खड़े उस्मान ख्वाजा ने उनका शानदार कैच लपका। इस कैच ने भारत की पहली पारी पर काफी असर डाला।


विदेशी धरती पर अजिंक्य रहाणे का बल्लेबाजी रेकॉर्ड बेहतर है। इस मैच से पहले भारत में उनका बल्लेबाजी औसत 41.05 था और विदेश में 45.61। ऑस्ट्रेलिया में तो उन्होंने 51.50 के औसत से रन बनाए थे। ऐसे में भारत को अपने इस बल्लेबाज से काफी भरोसा था लेकिन वह भी एक गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हुए। लंच से पहले भारत 56 रन पर चार विकेट खो चुका था।


हनुमा विहारी पर तरजीह देकर टीम में शामिल किए गए रोहित शर्मा ने कुछ अच्छे शॉट खेले। रोहित ने ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों पर संयम दिखाया और कमजोर गेंदों पर प्रहार किया। वह सेट होते नजर आ रहे थे। वह वैसी ही पारी खेल रहे थे जैसी भारत को जरूरत थी। लेकिन वह आक्रामकता की रौ में बह गए। नाथन लायन की गेंद पर छक्का लगाने के बाद अगली गेंद पर उन्होंने वही शॉट दोहराने का प्रयास किया लेकिन इस बार गेंद को लंबा मारने के बजाय हवा में ऊंचा मार बैठे और 37 रन बनाकर हैरिस के हाथों लपके गए।


टीम इंडिया के विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हुआ, तो फिर रुकने का नाम ही नहीं हुआ। देखते ही देखते 86 रन पर भारत की आधी टीम पविलियन में थी। 127 के स्कोर पर पंत के रूप में भारत ने अपना आखिरी बल्लेबाज भी खो दिया। फिर भी पुजारा ने हिम्मत नहीं हारी।


पहले अश्विन के साथ मिलकर उन्होंने 7वें विकेट के लिए 62 रन जोड़े। वह इशांत के साथ मिलकर अभी साझेदारी जमा ही रहे थे। लेकिन स्टार्क ने इशांत (4) को बोल्ड कर पविलियन लौटा दिया।
यहां से पुजारा ने शमी के साथ 9वें विकेट के लिए 40 रन जोड़े। इस बीच उन्होंने अपने टेस्ट करियर के 5000 रन और 16वां शतक भी पूरा किया। अब भारतीय टीम (250/9) एक सम्मानजनक स्कोर पर है।

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