नई दिल्‍ली

भारत में बीते कुछ दशक से सिक्कों का मूल्य लगातार घटता गया है. अब सिक्के से बहुत कम ही चीज़ें ऐसी होंगी जो खरीदी जा सकती हो. खास तौर पर कम मूल्य वाले सिक्कों से.  हर कोई जानता है कि सिक्के का मूल्य क्या है क्योंकि वो उसी पर ही उकेरा रहता है. लेकिन क्या आपने कभी इस पर हैरानी जताई है कि सिक्के को बनाने पर लागत कितनी आती है? क्या ये लागत सिक्के के मूल्य से ज़्यादा भी हो सकती है?

सिक्कों की लागत से जुड़ी इस पहेली को सुलझाने के लिए इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जानकारी मांगी.हमने RBI से ये भी जानना चाहा कि मौजूदा वक्त में किस किस मूल्य के सिक्कों का भारत सरकार की ओर से निर्माण कराया जा रहा है? बीते 5 साल में ऐसे कितने सिक्के ढाले गए.

हमारे सवालों को RBI ने देश की सभी टकसालों को भेजा. भारतीय सरकारी टकसाल, मुंबई की ओर से जवाब दिया गया कि मौजूदा वक्त में 10 रु, 5 रु, 2 रु और 1 रु के सिक्कों को ही इस टकसाल में ढाला जा रहा है.  जवाब में बीते 5 साल में टकसाल की ओर से जिन अलग अलग मूल्य के सिक्कों को ढाला गया, उनकी जानकारी भी दी गई. हालांकि इस टकसाल ने सिक्कों पर आने वाली लागत की जानकारी गोपनीयता का हवाला देते हुए देने से इनकार कर दिया. टकसाल ने जवाब में कहा, “ये जानकारी आरटीआई एक्ट, 2005 के सेक्शन  8 (1) (d) के तहत उपलब्ध नहीं कराई जा सकती क्योंकि ये ट्रेड सीक्रेट है.

हैदराबाद के सरकारी टकसाल का जवाब

RBI ने इंडिया टुडे के सवालों को हैदराबाद स्थित एक और सरकारी टकसाल को भी भेजा था. इस टकसाल की ओर से भी यही जवाब दिया गया कि फिलहाल उसकी ओर से चार मूल्यों के सिक्के ही ढाले जा रहे हैं. और वो सिक्के हैं- 10 रु, 5 रु, 2 रु और 1 रु. हैदराबाद टकसाल ने ये भी बताया कि बीते चार साल में अलग अलग मूल्य के कितने सिक्के ढाले गए. हालांकि इस टकसाल को मुंबई टकसाल की तरह सिक्कों के निर्माण पर आने वाली लागत को बताने में कोई गुरेज़ नहीं था.हैदराबाद टकसाल के मुताबिक 1 रुपए के सिक्के को बनाने में औसत लागत 1 रुपए 11 पैसे आती है. साफ है कि इस सिक्के का जितना मूल्य है, उससे लागत ज़्यादा है.

Source : Agency