छतरपुर
 कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी वायदे के चलते किसान कर्ज माफी की आस लगाए बैठे हैं। छतरपुर जिले के 25 हजार किसानों ने पिछला बकाया और 27 हजार किसानों ने वर्ष 2017 का खरीफ का कर्ज नहीं चुकाया है। इधर, रवि फसल के लिए भी अब तक 30 करोड़ रुपए बांट दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना के तहत ब्याज माफ करने के बावजूद केवल 12 हजार 690 किसानों ने ही लोन चुकाया है, जिसकी राशि मात्र 32 करोड़ रुपए हैं, जो वापस आए हैं। पिछले साल के बकाया को देखा जाए तो 22 फीसदी किसानों ने ही लोन चुकाया है। ब्याज माफ करने की योजना लागू है, जिसकी लाभ भी दिया जा रहा है। लेकिन सिर्फ चुनावी वायदे के चलते किसान लोन की राशि नहीं चुका रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनका पूरा कर्ज माफ हो सकता है। इस तरह से करीब 78 फीसदी किसान कर्ज की राशि ब्याज माफ होने के बाबजूद नहीं चुका रहे हैं।

79 करोड़ ब्याज छोड़ा, फिर भी नहीं लौटी रकम :

जिला सहकारी बैंक छतरपुर ने जिले की 113 सोसायटी के जरिए 55 हजार किसानों को खरीफ के लिए 130 करोड़ रुपए का लोन दिया था। जिसका ब्याज ही 79 करोड़ रुपए होता है, इन किसानों को मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना के तहत लोन का मूलधन देने पर ब्याज नहीं चुकाना है। ब्याज की राशि 20 फीसदी सोसायटी और 80 फीसदी सरकार वहन कर रही है। लेकिन इस योजना के बावजूद 55 हजार किसानों में से 78 फीसदी किसानों ने इस योजना का लाभ नहीं लिया है। केवल 12 हजार 690 किसानों ने ही अपनी लोन राशि अदा की है। 

ये है मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना :

'प्रदेश में मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना'लागू की गई है। किसान अपने बकाया ऋण के मूलधन की 50 प्रतिशत राशि जमा कर इस योजना का लाभ ले सकेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार योजना का लाभ लेने के लिये कृषक द्वारा बकाया मूलधन की 50 प्रतिशत राशि एक मुश्त अथवा किश्तों में जमा कराना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। कृषक द्वारा जिस दिनांक को शेष आधे मूलधन की राशि चुकाई जाएगी, उसी दिन कृषक को इस राशि के बराबर का शून्य प्रतिशत ब्याज का नया ऋण भी मिल सकेगा। इसके साथ ही शेष बकाया ब्याज की पूरी राशि माफ कर दी जाएगी। 

ये है चुनावी वायदा, जिसने अटकाया :

राहुल गांधी ने 6 जून 2018 को मंदसौर में एलान किया कि कांग्रेस की सरकार आने पर किसानों का पूरा कर्ज 10 दिन में माफ किया जाएगा। चुनावी ऐलान के बाद जिले में ऋण बसूली की दर 4 फीसदी गिर गई। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते गए किसान ऋण पर ब्याज माफी योजना तक का लाभ लेने से पीछे हट गए। इसकी वजह मानी जा रही है कि किसान को चुनावी वायदे से ये उम्मीद है, कि उनके कर्ज का मूलधन माफ हो जाएगा।

चुनावी वायदे पर भरोसा करने की ये है वजह :

भाजपा सरकार द्वारा ब्याज माफी की स्कीम लाने और उसकी बार-बार मियाद बढ़ाने के बावजूद योजना का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या मात्रा 22 फीसदी है। इसके पीछे ये वजह मानी जा रही है कि लोन लेने वाले किसान घाटे में हैं, फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है, इतना ही नहीं लगभग 30 फीसदी किसान घाटे के चलते मजदूर बन गए, जो अब पलायन कर चुके हैं। इन्हीं वजहों से किसान ब्याज माफी की स्कीम का लाभ नहीं ले पा रहे हैंं। और कर्ज माफी के कांग्रेस के वायदे पर भरोसा करने को मजबूर है या वायदे से उम्मीद लगाए बैठे हैं।
 
वसूली की दर घटी है :

किसानों के लोन वापसी की दर घटी है, केवल खरीफ फसल का 130 करोड़ रुपए बकाया है। मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना के तहत अभी तक 32 करोड़ रुपए का सेटलमेंट हुआ है। इस बार रवि फसल के लिए अभी तक 30 करोड़ रुपए का लोन दिया गया है। 

- कमल मकाश्रे, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक छतरपुर

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