विभूति शारीरिक और मानसिक शांति प्रदान करने वाली प्रसिद्ध दवा है। इसके सेवन से कई रोगों से राहत मिलती है। यही नहीं भगवान शंकर अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते थे।

विभूति शारीरिक और मानसिक शांति प्रदान करने वाली प्रसिद्ध दवा है। इसके सेवन से कई रोगों से राहत मिलती है। यही नहीं भगवान शंकर अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इससे वे इस बात का संकेत देते थे कि ये सृष्टि नश्वर है या कह लें मृत्यु कारक है जो इस संसार में आया है उसने एक न एक दिन राख बन धरती में ही समा जाना है। हिंदू धर्म में कई लोग इसे माथे पर भी लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं माथे पर विभूति क्यों लगाई जाती है, और इसके क्या फायदे हैं। अगर नहीं तो आइए जानते हैं इसके बारे में और भी बाते- 
 
विभूति जिसे कुछ लोग आम बोलचाल में राख और भस्म भी कहते हैं। इसके अनगिनत फायदे है। हिंदू धर्म में दो प्रकार की पवित्र राख बताई गई है। जिसमें एक शमशान भूमि से प्राप्त होती हैं और दूसरी पवित्र राख को गाय के सूखे हुए गोबर या चावल के चोकर में कुछ और पदार्थ डालकर बनाया जाता है।कहा जाता है कि माथे पर विभूति लगाने से इंसान के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इस लगाने वाला इंसान अच्छे विचारों को धारण करता है। ग्रंथों में इसके इस्तेमाल से मानसिक रूप से शांति मिलती है। इससे वह शख्स सकारात्मक विचारों को धारण करता है। 

माना जाता है कि विभूति लगाने वाला शख्स मानसिक रूप से बहुत ही शांत होता है। कहते हैं कि ऐसा शख्स घबराता नहीं है और अपने जीवन में काफी सोच-समझकर फैसले लेता है। वास्तु और ज्योतिष दोनों का कहना है कि विभूति लगाने से आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे माहौल खुशनुमा बना रहता है। साधु-संत भी इस राख को बड़ी ही आस्था के साथ इस्तेमाल करते हैं।

सुबह घर से निकलने से पहले भस्म कहां और कैसे लगाएं
परंपरा के अनुसार भस्म को अंगूठे और अनामिका के बीच लेकर लगानी चाहिए। भौंहों के बीच, जिसे आज्ञा चक्र कहा जाता है, गले के गड्ढे में, जिसे विशुद्धि चक्र कहा जाता है और छाती के मध्य में, जिसे अनाहत चक्र के नाम से जाना जाता है, में विभूति लगानी चाहिए। हिंदू धर्म में आमतौर पर इन बिंदुओं पर विभूति लगाने से इंसान बुद्धिमान बनता है।

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