रायपुर
 विधायक देवव्रत सिंह ने कहा कि राजनीति में जो भी होता है, वह धारणा के अनुसार होता है। पिछली भाजपा सरकार में जनता को यह लगने लगा कि अच्छा नहीं चल रहा है, इसलिए नए सरकार को जनादेश दिया। लेकिन यह सरकार भी पिछली सरकार की तरह ही चल रही है।

प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद की है, लेकिन राज्यपाल के भाषण में इसे 32वें नंबर पर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। नक्सलवाद की लड़ाई में 10 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार हो रहा है। सिस्टमैटिक इन्क्लूसिव करप्शन का जरिया नक्सलवाद बन गया है। नक्सलियों को पीछे से पैसा देने का काम पिछली सरकारों ने किया।


भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए हर काम के दोगुने दाम दिए गए। सड़क की आड़ में पेड़ काट दिया गया, आयरन निकाल लिया गया। देवव्रत ने कहा कि प्रदेश के 40 विधानसभा में कोल माफिया, वन माफिया का कब्जा है।

40 फीसदी विधायकों का परफॉर्मेंस माफिया तय करता है। किसे विधायक बनाना है, किसे नहीं बनाना है, यह भी उन्हीं के हाथ में है। सरकार को इस मैसेज को तोड़ना है। सरकार आने के बाद यह चर्चा आम हो गई कि शराब दुकान पर बीजेपी का चखना नहीं चलेगा, अब कांग्रेस का चखना चलेगा।

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