रायपुर
 छत्तीसगढ़ में भाजपा की सियासत में एक बार फिर आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मुहिम तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्रों में सुपड़ा साफ होने के बाद भाजपा का एक गुट आदिवासी नेता रामविचार नेताम और केदार कश्यप का नाम आगे कर रहे हैं।

पार्टी को सरगुजा और बस्तर की 26 विधानसभा में सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की थी और यहां से आने वाले चारों मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद आदिवासी नेताओं का गुट एक बार फिर सक्रिय हुआ है।


भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो सरगुजा से आदिवासी नेता रामसेवक पैकरा और शिवप्रताप सिंह प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि बस्तर से लंबे समय से कोई प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना है। रायगढ़ से आदिवासी नेता और केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय भी प्रदेश अध्यक्ष बन चुके हैं।

यही नहीं, आदिवासियों का मन जीतने के लिए बस्तर से केदार कश्यप का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि यहां से सुभाऊ कश्यप और लता उसेंडी के नाम की भी चर्चा है, लेकिन इनकी मजबूत दावेदारी नहीं मानी जा रही है। ये दोनों नेता पिछला दो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।


कांकेर से आदिवासी नेता विक्रम उसेंडी का नाम भी सामने आ रहा है। वे सांसद हैं और प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष भी हैं। लोकसभा में रहने के कारण उनके केंद्रीय संगठन से करीबी मानी जा रही है। हालांकि उसेंडी भी पिछले विधानसभा चुनाव में हार गये थे।

भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने दस फीसदी सवर्ण आरक्षण देकर बड़ा दांव खेला है। ऐसे में भाजपा के एक बड़ा वर्ग राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय के नाम को आगे कर रहा है। केंद्रीय संगठन में पकड़ का भी सरोज को फायदा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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