भोपाल 
पंद्रहवी विधानसभा के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद तीन दशक बाद सत्ता पक्ष यानि कांग्रेस के पास है। दोनों ही पदों पर बीजेपी ने भी उम्मीदवार उतारे थे लेकिन वह हार गई। बीजेपी के इस कदम पर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है ऐसा बीजेपी ने रणनीति के तहत किया है। विधानसभा में दोनों पदों पर हुए सियासी घमासान को लेकर अब बीजेपी इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव के लिए जनता के बीच जाने वाली है। बीजेपी लोकसभा चुनाव के लिए अब जनता के बीच कांग्रेस को अलोकतांत्रिक और अहंकारी होने के आरोप लगाकर उतरेगी। 

दरअसल, विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद भी पार्टी ने विधायकों की संख्य होने की बात कहकर अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार उतारे। इससे एक नई बहस ने जन्म लिया। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि बीजेपी ने ऐसा कर तीन दशक पुरानी परंपरा तोड़ी है। अभी तक परंपरा रही है कि जो पार्टी सत्ता में आती है अध्यक्ष पद का चुनाव भी वहीं करती है। लेकिन बीजेपी ने इस परंपरा को तोड़ते हुए अपना उम्मीदवार उतारा।

इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी से डिप्टी स्पीकर का पद भी छीन लिया। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने परंपरा को तोड़ने की पहल की है, इसलिए ऐसा हुआ है। लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीजेपी ने ऐसा सोची समझी रणनीति के तहत किया है। 

लोकसभा चुनाव में महज तीन महीने का सामय रह गया है। विधानसभा चनाव हारने के बाद अब बीजेपी के पास कुछ खास मुद्दे नहीं है जिससे कांग्रेस का घेराव किया जा सके। कांग्रेस ने किसान कर्ज माफी कर मास्टर स्ट्रोक भी लगा दिया। पहले बीजेपी की रणनीति थी कि कांग्रेस को किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर घेरती, लेकिन कांग्रेस ने ये मौका भी नहीं दिया। अब पार्टी नई रणनीति के तहत जनता के बीच जाएगी। सियासी फायदा उठाने और जनता की हमदर्दी के लिए बीजेपी ने ये दोनों पद गंवा दिए हैं।

डिप्टी पद पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष के चयन पर सवाल खड़े करते हुए बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने का काम करेगी। इससे वह सियासी रुख अपनी ओर कर सकती है। लोकसभा चुनाव के गणित के मुताबिक एमपी की 29 लोकसभा सीटों में से फिलहाल 26 बीजेपी और 3 कांग्रेस के पास हैं। कांग्रेस की कोशिश विधानसभा चुनाव के परफॉर्मेंस को दोहराते हुए लोकसभा चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन की है. वहीं बीजेपी अपने दबदबे को बरकरार रखने के लिए सियासी जाल बुन रही है।

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