भिलाई
छत्तीसगढ़ के गौरव और सम्मान में अब एक और उपलब्धि जुड़ गई है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पंडवानी गायन के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध तीजन बाई को पद्म विभूषण सम्मान देने की घोषणा की. तीजन बाई को मिलने वाला ये सम्मान कला जगत और छत्तीसगढ़ के सम्मान को दर्शाता है. महाभारत की कथा को पंडवानी गायन के जरिए देश और दुनिया के सामने लाने वाली तीजन बाई की उपलब्धियों में अब एक और सितारा जुड़ गया है. महाभारत की जटिल कथा और इसके तमाम पात्रों को अपने चेहरे से दर्शकों के मन में उतारने वालीं तीजनबाई को 1998 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण सम्मान मिल चुका है. अब 2019 में पद्मविभूषण मिलने जा रहा है. उन्हे तीन विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त है.

पाण्डवानी गायन के लिए तीजन बाई ने किया संघर्ष

दुनिया की सबसे चर्चित कथाओं में से एक महाभारत की कथा को पूरे वेग और संप्रेषणिता के जरिये मंच पर उतारने वाली सुप्रसिद्ध पण्डवानी गायिका तीजनबाई छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में पूरी दुनिया में पहचानी जाती है. तीजनबाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 में भिलाई ज़िले के गिनियार गांव में हुआ था. बृजलाल पारधी तीजनबाई के नाना थे जो खुद भी एक अच्छे पण्डवानी गायक थे. तीजन बाई का पालन पोषण भी बृजलाल पारधी ने ही किया था.

तीजनबाई के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था. तीजन बाई का विवाह 12 साल की उम्र में हो गया था. उसके बाद तीजनबाई ने तीन विवाह और किए, अब वह अपने चौथे पति तुक्का राम के साथ जीवन व्यतीत कर रही है. तीजनबाई का पहला विवाह पारधी जनजाति में हुआ था जहां पर महिलाओं को पण्डवानी गाने की अनुमति दी जाती थी. तीजनबाई जिस जनजाति की थी उसमें में सिर्फ पुरुष पण्डवानी गाते थे और महिलाएं सुनती थी.

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