भोपाल
विधानसभा जीत से गदगद हो रही कांग्रेस लोकसभा चुनाव में 'विन 29 ' का लक्ष्य लेकर चल रही है।इसके लिए प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी बहुत सावधानी बरती जा रही है। केवल उन्ही प्रत्याशियों के नामों पर विचार किया जा रहा है जो जीत दिलवा सके।वही विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले बागियों औऱ भितरघातियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। कही ना कही इन्हीं बागियों के कारण पार्टी बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में असफल रही और सपा-बसपा और निर्दलीयों से गठबंधन करना पड़ा। इस बार बसपा-सपा ने मध्यप्रदेश में गठबंधन कर लिया है लेकिन कांग्रेस को बाहर रखा है,जिसके चलते खेल बिगडने के आसार है। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों से दो टूक शब्दों में कह दिया है कि  लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए विधानसभा चुनाव में बागी होकर लड़े लोगों को मनाएं, इस बार कोई चूक नही होनी चाहिए, बागियों की नाराजगी दूर की जाए।

दरअसल, इन दिनों कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन को लेकर बैठकों का दौर जारी है।भोपाल से लेकर दिल्ली तक रणनितियां बनाई जा रही है। विधानसभा में जीत के बाद कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भी परचम लहराने को आतूर नजर आ रही है। इसी कड़ी में बुधवार को प्रदेश कांग्रेस के पार्टी पदाधिकारियों से संगठन की मजबूती लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 1 घंटे तक चर्चा की और लोकसभा चुनाव में  हर हालत में जीत दर्ज कराने की बात कही।   कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 150 सीटें मिलने की पूरी उम्मीद थी। किंतु पार्टी से टिकट न मिलने से बागी होकर चुनाव लड़े प्रत्याशियों ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया जिससे चुनाव नतीजों में कांग्रेस 114 सीटों पर सिमट कर रह गई। पार्टी के सर्वे में यह बात सामने आई कि उसे बागियों की वजह से करीब 40 सीटों पर नुकसान हुआ और जिससे पार्टी के प्रत्याशी जीत नहीं पाए। लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए विधानसभा चुनाव बागी होकर लड़े लोगों को मनाएं। बसपा, सपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी या अन्य कांग्रेस की विचारधारा से मेलजोल रखने वाले लोगों को पार्टी में शामिल कराएं। इस बार कोई लापरवाही नही होनी चाहिए। पार्टी का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने का है।

कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में ग्वालियर-चंबल अंचल में डैमेज कंट्रोल करने की जिम्मेदारी स्वयं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली थी जिससे पार्टी को 34 में से 26 सीटों पर जीत मिली। विधानसभा चुनाव के ये परिणाम लोकसभा चुनाव के नतीजों में परिवर्तित होते हैं तो पार्टी को इस अंचल की चारों सीटें गुना-शिवपुरी, मुरैना, ग्वालियर और भिंड सीट पर जीत पक्की लग रही है।हालांकि इसके लिए पार्टी ने तैयारियां शुरु कर दी है। सिंधिया के साथ साथ उनकी पत्नी प्रियदर्शनी भी अंचल में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। इसके अलावा चंबल के नेताओं को भी जीत की जिम्मदारी सौंपी गई है जो कांग्रेस के फेवर में माहौल तैयार  कर सके।वर्तमान में 29  सीटों में से कांग्रेस के पास केवल तीन सीटें है।

इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को मालवा निमाड़ में बड़ा नुकसान उज्जैन लोकसभा में हुआ, जहां माया त्रिवेदी, राजेंद्र वशिष्ठ पार्टी से बागी होकर चुनाव लड़े और दोनों सीटें भाजपा जीत गई। इसी तरह महिदपुर सीट पर भी कांग्रेस के बागी  दिनेश जैन बोस को जनता का खासा समर्थन मिला। मंदसौर लोकसभा सीट पर भी पार्टी के बागियों ने पार्टी को खासा नुकसान पहुंचाया। इस लोकसभा सीट पर पार्टी नए सिरे से जीत के समीकरण बिठा रही है। इस लोकसभा में आने वाली 8 सीटों में से सिर्फ कांग्रेस  सुवासरा सीट ही  350 वोटों से जीत पाई। बाकी सात सीटों पर उसे मुंह की खाना पड़ा। जावद से निर्दलीय चुनाव लड़े समंदर पटेल पार्टी प्रत्याशी पर भारी रहे, हालाकि वे चुनाव हार गए।इसलिए पार्टी बागियों को पहले से ही मनाने में जुट गई है ताकी फिर से कोई नुकसान ना उठाना पड़े।

खंडवा लोकसभा से तहत आने वाली सिर्फ तीन सीटों पर ही पार्टी प्रत्याशी झूमा सोलंकी, सचिन बिड़ला और नारायण सिंह पटेल को  जीत मिली। इनमें पार्टी की बागी रूपाली बारे के निर्दलीय मैदान में उतरने से पार्टी को नुकसान पहुंचा। इसी तरह बुरहानपुर से तो पार्टी के निर्दलीय सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने मंत्री अर्चना चिटनिस को हराकर चुनाव जीता। इस लोकसभा सीट पर डैमेज कंट्रोल करने की जिम्मेदारी पार्टी पदाधिकारियों को सौंपी गई है।पार्टी नही चाहती कि विधानसभा चुनाव की तरह इस सीट पर खेल बिगडे और हार हाथ लगे।इसलिए पहले से ही सभी को सचेत कर दिया गया है।हां की 8 विधानसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी, 4 पर कांग्रेस और 1 सीट पर निर्दलीय का कब्जा है।नंदकुमार यहां से वर्तमान सांसद है।लेकिन जनता की नारजगी के चलते इस सीट पर कांग्रेस को जीतने की उम्मीद है।सालों पहले इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा हुआ करता था।

रीवा लोकसभा सीट की आठों विधानसभा  सीटों पर कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इस सीट को लेकर कांग्रेस मे विशेष मंथन किया जा रहा है। वही सतना लोकसभा के अंतर्गत आने वाली दो सीटों पर ही कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह और नीलांशु चतुर्वेदी जीते। बाकी सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। सीधी लोकसभा सीट से सिंहावल से पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल जीते। इस लोकसभा के तहत आने वाली बाकी सीटें भाजपा ने जीती। सतना से कांग्रेस वरिष्ठ नेता अजय सिंह को उतारने की तैयारी कर रही है।हालांकि कई अन्य के नामों को लेकर भी चर्चा चल रही है।

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