इस्लामाबाद

पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में बढ़ी तल्खी कम करने के लिए करतारपुर कॉरिडोर के मसौदा समझौते पर चर्चा के लिए पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल आज 14 मार्च को भारत आया।  दोनों मुल्कों के बीच हुई  बातचीत सकारात्मक रही  और इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अगली बैठक 2 अप्रैल को होगी। इसके बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी 28 मार्च को इस्लामाबाद का दौरा करेगा। इस कदम को दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच तनाव घटाने में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि जब तक पाक आतंकवाद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है, तब तक उनके साथ कोई बातचीत नहीं हो सकती है। 

उन्होंने कहा कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि अगर पाकिस्तान के पीएम इमरान खान इतने ही उदार हैं तो मसूद अजहर को भारत को क्यों नहीं  सौंप देते। उधर, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने इसकी पुष्टि की है और इस फैसले की जानकारी देने के लिए भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त गौरव अहलुवालिया को विदेश मंत्रालय बुलाया। पाकिस्तान ने शर्त रखी थी कि करतारपुर गलियारे को लेकर वह अपना प्रतिनिधिमंडल तभी भेजेगा, जब भारत भी इस्लामाबाद में होने वाली अगली मीटिंग में अपना दल भेजेगा। पुलवामा अटैक और एयर स्ट्राइक के बाद बेहद तल्ख माहौल के बावजूद भारत ने पिछले हफ्ते ही (विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई से पहले) कहा था कि वह करतारपुर पर होने वाली मीटिंग कैंसल नहीं करेगा।

केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है बालाकोट में इंडियन एयरफोर्स की एयर स्ट्राइक 'सीमित और आतंक के खिलाफ' कदम था। सरकार के सूत्रों का कहना है, 'पाकिस्तान ने दो मुल्कों के बीच जंग का माहौल बनाया था। भारत की तरफ से कभी नहीं कहा गया कि वह करतारपुर को लेकर होने वाली मीटिंग कैंसल करेगा।' बता दें कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के करतारपुर से भारत के गुरदासपुर जिले स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे तक विशेष कॉरिडोर खोलने पर दोनों सरकारों के बीच सहमति बनी थी। करतारपुर में ही गुरु नानक देव जी ने जीवन का अंतिम समय बिताया था।

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