रायपुर 
लोकतंत्र के महासंग्राम का ऐलान हो चुका है. इस संग्राम में जीत के लिए राजनीतिक दल रणनीति भी बना लिये हैं. छत्तीसगढ़ के लोकसभा चुनाव के इतिहास में बसपा अपना आज तक खाता भी नहीं खोल सकी है. जबकि बसपा के संस्थापक कांशीराम ने अपना पहला चुनाव यहीं की धरती से लड़ा था. इसे बसपा का  'पैतृक' सीट भी कहा जाता है. लेकिन अब लोकसभा चुनाव 2019 बसपा जीत का दावा कर रही है.

बसपा के संस्थापक कांशीराम ने साल 1984 में तब मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ की जांजगीर-चापा लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन निराशा हाथ लगी थी. तब से लेकर अब लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ से बसपा को एक भी सीट नहीं मिली है. अब इस चुनाव में बसपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम का दावा है कि इस बार जांजगीर सीट जीत कर पार्टी सुप्रीमो मायावती को गिफ्ट देंगे.

साल 1984 से अब तक सभी लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की सीटों पर बसपा ने हिस्सा तो लिया, लेकिन जनता ने उनके उम्मीदवारों को सिरे से नकार दिया. यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा के नेता बसपा के जीत के दावे को चुनावी सगूफा बता रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि पिछले चुनाव में अपने प्रभाव वाले उत्तर प्रदेश में बसपा खाता भी नहीं खोल सकी थी. छत्तीसगढ़ में तो प्रभाव की बात ही दूर की है.

कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में बसपा भले ही एक दो सीट जीत रही हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में बसपा का अस्तित्व नहीं है. इस बार भी उसे जीत नहीं मिलेगी. हालांकि राजनीतिक जानकार रविकांत कौशिक मानते हैं कि जब भी राष्ट्रीय दल अपने वादों पर खरे नहीं उतरें हैं तो जनता ने उनका विकल्प क्षेत्रीय दलों के रूप में चुन लिया है. बहरहाल छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें लाकर अपनी जमीन तैयार करने वाली बसपा खुद को लोकसभा में भी मजबूत होने का दावा कर रही है. लेकिन हालाकि दावे कितने सही साबित होंगे यह जनता ही तय करेगी.

Source : Agency