भोपाल

प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के आदेश को ठेंगे पर रख दिए हैं। राज्यपाल पटेल ने समन्वय समिति में सभी कुलपतियों को परीक्षा में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए बारकोड का इस्तेमाल करने के आदेश दिए थे, जिसका पालन प्रदेश के सिर्फ दो विवि कर रहे हैं। शेष विवि पुरानी परंपरा के तहत ही परीक्षा कराने जा रहे हैं।

राज्यपाल पटेल के आदेश के बाद भी बरकतउल्ला विश्वविद्यालय साधारण उत्तरपुस्तिकाओं से 29 मार्च से प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं कराने जा रहा है। जबकि राज्यपाल पटेल ने उत्तरपुस्तिकाओं में बारकोड डालने के आदेश दिए थे। ऐसे में विद्यार्थी इस बार भी सादी कॉपी पर ही परीक्षा देंगे। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को ट्रेंड किया जाना था। इसके लिए विवि ने जनवरी में कर्मचारियों से आवेदन भी मांगे थे, लेकिन उसके बाद मामला शांत हो गया।

विवि की प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं 29 मार्च से शुरू होंगी। परीक्षा में करीब एक लाख 6 0 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें प्रथम वर्ष में 90 हजार और द्वितीय वर्ष में करीब 70 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। बीकॉम, बीएससी, बीए, बीए मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए और बीएससी होमसाइंस प्रथम वर्ष की परीक्षाएं 29 मार्च से शुरू होकर सात जून तक चलेंगी। परीक्षाएं तीन पाली में होंगी। पहली पाली सुबह सात से दस बजे तक, दूसरी पाली सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक और तीसरी पाली दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चलेगी। विद्यार्थियों की सं या में इजाफा हो सकता है, क्योंकि बीयू ने एक हजार रुपए का विशेष शुल्क जमा के साथ परीक्षा शुरू होने के तीन दिन पहले तक परीक्षा फार्म जमा करने की व्यवस्था की है। जबकि प्राचार्य दो पाली में परीक्षाएं कराने के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार यशवंत पटेल बैठक में अपना इरादा बता चुके थे।

दो विवि ही करते हैं उपयोग

आंसर शीट में बारकोड इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था अभी प्रदेश के सिर्फ दो विश्वविद्यालयों में है। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर ने बारकोड की व्यवस्था कर ली है। विश्वविद्यालयों में रिजल्ट में गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के आदेश अधिकारियों को दिए थे। राज्यपाल ने उत्तरपुस्तिकाओं में बारकोडन होने पर नाराजगी भी जताई थी। वहीं सीसीटीवी कैमरे भी परीक्षा केंद्रों पर नहीं लगाए गए हैं।

बारकोड के फायदे

अगर आंसर शीट में बारकोड छपा होता है, तो उस कॉपी को बदला नहीं जा सकता। वहीं बारकोड होने से यह भी पता नहीं चलता है कि संबंधित कॉपी किस छात्र की है। छात्र की पहचान बारकोड से होती है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी करना आसान नहीं होता।

आउट सोर्सिंग का किया था विरोध

यूनिवर्सिटी के कुलपति आरजे राव के अनुसार वर्तमान में विश्वविद्यालय के पास जो संसाधन हैं, जो सिस्टम हैं वे अपडेट नहीं हैं और न ही कर्मचारियों को तकनीकी नॉलेज है। इस कारण यह काम आउट सोर्सिंग से करने का प्लान तैयार किया गया था, लेकिन कर्मचारियों के विरोध के बाद टेंडर निरस्त कर दिया गया है। इस कारण सादी कॉपी पर ही परीक्षा आयोजित कराई जाएगी।

आवेदन के बाद मामला शांत

विवि के कुलपति ने नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने की बात कही थी, ताकि उन्हें तकनीकी नॉलेज हो सके। विवि ने जनवरी में इसके लिए आवेदन भी बुलाए थे, लेकिन इसके बाद मामला शांत हो गया। कर्मचारियों ने बताया कि आवेदन के लिए भी तीन दिन का समय दिया गया था, जिसमें टे्रनिंग कहां और किस तरह दी जाएगी, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं था।

निजी विवि कर रहे आदेश का पालन

निजी विवि विनियामक आयोग के अध्यक्ष अखिलेश कुमार पांडे का कहना है कि राज्य का हरेक निजी विवि राज्यपाल के आदेश के तहत ही परीक्षाएं करा रहे हैं। बल्कि वे सुरक्षा के ज्यादा से ज्यादा मापदंड को अपना रहे हैं,ताकि भविष्य में उनके खिलाफ कोई उंगली नहीं उठा सके।

Source : Agency