प्रदेश सरकार ने सूबे के तीन विवि के कुलपतियों को रडार पर ले लिया है। उनके खिलाफ जांच समितियां भी गठित कर दी हैं। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद शासन कुलपतियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसमें देवी अहिल्या विवि इंदौर, विक्रम विवि उज्जैन और भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल हैं। 

भाजपा सरकार की विदाई के बाद कांग्रेस सरकार ने कुलपतियों को बदलने की व्यवस्था जमा दी है। शुरूआती चरण में छतरपुर विवि से प्रियव्रत शुक्ला और उज्जैन विवि के कुलपति एसएस पांडे अपना इस्तीफे ले जा चुके हैं। अब डीएविवि, भोज और विक्रम विवि के कुलपतियों को हटाने की व्यवस्था बना दी गई है। शासन ने सबसे पहले डीएविवि के कुलपति नरेंद्र धाकड़ को हटाने के लिए जांच कमेटी बनाई है। कुलपति धाकड़ ने संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर को भर्ती कराने के लिए साक्षात्कार के रखे थे,जिसके रिजल्ट जारी होने वाले थे। शासन ने उनके रिजल्ट पर रोक लगाते हुए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इसमें एडी इंदौर, रजिस्ट्रार एचएस त्रिपाठी और डीआर आरके बघेल को रखा है। उन्हें दस दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपना है।

विक्रम विवि में एसएस पांडे का इस्तीफा होने के बाद राजभवन ने बालकृष्ण शर्मा को कुलपति नियुक्त किया है। कुलपति शर्मा को हटाकर उनके स्थान पर शासन अपना कुलपति बैठाना चाहती है, जिसके लिए भी तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इसमें भी एडी उज्जैन के साथ भोज विवि रजिस्ट्रार एचएस त्रिपाठी को रखा है। ये कमेटी भी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय शासन लेगा। 

कुलपति की पीएचडी की जांच 

भोज विवि के कुलपति जयंत सोनवलकर के खिलाफ पीएचडी में कापी करने की शिकायत शासन से की गई थी। इसलिए शासन ने भोपाल संभाग की संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव को जांच का दायित्व सौंपा है।

उन्होंने भी कुलपति सोनवलकर की जांच करने की व्यवस्था जमा दी है। 

विक्रम में लगी थी धारा 52 

शासन विक्रम विवि में धारा 52 लगाती। इसके पहले पांडे अपना इस्तीफा राजभवन को सौंप चुके थे। इसके चलते राजभवन ने वरिष्ठ प्रोफेसर शर्मा को कुलपति का प्रभार दिया था। धारा 52 कीफाइल ओके होने के बाद भी राजभवन ने शर्मा को ही कुलपति नियुक्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इसके बाद मंत्री जीतू पटवारी को कुलपति शर्मा की योग्यता पर सवाल खड़े करते हुए शिकायत की थी। इसके तहत कमेटी गठित की गई है।

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